राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: पांच साल पहले 2013 के चुनाव में विधानसभा क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने का वादा कर सत्ता में पहुंचे ‘माननीय’ एक बार फिर ताजा वादों के साथ चुनाव मैदान में है।
-काफी मिला बहुत कुछ रह गया बाकी
-आज भी मुद्दा पांच साल पुरानी समस्याएं
नागौर. पांच साल पहले 2013 के चुनाव में विधानसभा क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने का वादा कर सत्ता में पहुंचे ‘माननीय’ एक बार फिर ताजा वादों के साथ चुनाव मैदान में है। मौजूदा विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी लाम्बा पिछले चुनाव के समय किए गए वादों को पूरा करने का दावा करते हैं वहीं लोगों का कहना है कि पांच साल में कुछ नहीं बदला। सब कुछ वैसा ही है। ना सडक़ें बदली, ना नियमित रूप से स्वच्छ जल मिला। युवाओं का रोजगार आज भी सपना है। सडक़ें भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जेएलएन अस्पताल रेफरल अस्पताल से आगे नहीं बढ़ पाया वहीं ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव किसी से छिपा नहीं है।
कई विवादों के कारण रहे चर्चा में
उच्च शिक्षा को बढावा देने व बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का नारा देने वाली पार्टी के विधायक जिला मुख्यालय के मिर्धा कॉलेज, माडीबाई महिला कॉलेज व विधि कॉलेज से जुड़ी समस्याओं को समाधान नहीं करवा पाए। कभी संबद्धता का मामला व स्टाफ की कमी तो कभी आधारभूत सुविधाओं को लेकर छात्र-छात्राओं को सडक़ों पर उतरना पड़ा लेकिन विधायक मांगों को पूरा नहीं करवा पाए। आलम यह रहा कि मिर्धा कॉलेज की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में विधायक अतिक्रमियों के पक्ष में खड़े नजर आए, जिसके चलते उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर क्षेत्र के लोगों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा।
वापस ले ली स्वीकृत राशि
विधायक पिछल साल में हुए उन कामों को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं जो कांग्रेस के राज में प्रस्तावित व स्वीकृत हो चुके थे। सीवरेज, मीठा पानी, जेएलएन में स्टाफ की संख्या बढाने, सी-61 पर ऑवरब्रिज जैसे कार्यों की लम्बे समय से मांग थी। मौजूदा विधायक अपने कार्यकाल के पांच साल में एक भी सडक़ ऐसी नहीं बनवा पाए जो चलने लायक हो। गाजी खाडा के उद्धार के लिए विधायक निधि से स्वीकृत की गई राशि वापस लेकर भी विधायक सुर्खियों में रहे। शहर में जलापूर्ति, अमृत मिशन में काम भले ही हो रहा हो लेकिन मॉनीटरिंग के अभाव में जनता के करोड़ों रुपए बेकार हो जाएंगे।
आज भी नहीं बदले हालात
शहर में लम्बे समय से चल रहा सीवरेज के तीन चरण का कार्य पूरा हो चुका है लेकिन कार्य में खामियों व लापरवाही को लेकर रुडिप हमेशा चर्चा में रही। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी शहर के 40 से ज्यादा वार्डों का गंदा पानी सीवरेज क बजाय नालियों में ही जा रहा है। प्रोपर्टी कनेक्शन तक नहीं हुए। सडक़ें बदहाल है तो पेयजलापूर्ति से आ रहा बदबूदार व गंदा पानी लोगों को बीमार कर रहा है। पांच साल में बहुत कुछ बदला लेकिन नहीं बदले तो शहर के हालात। आज भी सब कुछ वैसा ही है, जैसा पांच साल पहले था।
चिकित्सा सेवाएं बदहाल
नागौर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण आंचल में लोगों को मीठा पानी अवश्य मिला लेकिन बिल के भुगतान को लेकर उपजे विवाद के चलते कई गांवों में पेजयलापूर्ति बंद है। जेजेवाई का बुरा हाल है। ग्रामीण अंचल में सडक़ निर्माण से जरुर ग्रामीणों को राहत मिली। मिसिंग लिंक सडक़ों का निर्माण होने से लोग परिवहन सेवाओं से लाभांवित हुए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सालयों में स्टॉफ का ठहराव नहीं होने से लोग चिकित्सा सुविधाओं से महरूम है। फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के साथ छलावा ही हुआ लेकिन सरकार कोई राहत नहीं दे पाई।