
राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019
नागौर. राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 के तहत नागौर जिले सहित प्रदेश में लगाए गए कृषि उद्योगों को मिलने वाली अनुदान राशि की दूसरी व तीसरी किस्त पिछले दो साल से जारी नहीं हो रही है। नागौर जिले के 14 व पूरे प्रदेश के करीब 500 उद्यमियों को अनुदान की दूसरी व तीसरी किस्त के रूप में लाखों रुपए की सहायता मिलने की ‘उडीक’ पिछले दो साल से है, लेकिन यह कब पूरी होगी, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है। ऐसा भी नहीं है कि सरकार ने अनुदान की किस्तें देने से मना कर दिया है, अधिकारी केवल बजट नहीं होने की बात कह रहे हैं, ऐसे में उद्यमियों को उम्मीद भी है। खास बात यह है कि जब तक अंतिम किस्त जारी नहीं होगी, तब कि पूर्व में जारी पहली व दूसरी किस्त का लाभ भी उद्यमियों को नहीं मिल पाएगा। कई उद्यमी ऐसे हैं, जिन्हें पहली व दूसरी किस्त जारी हो गई, जिसकी राशि बैंक खाते में दर्शा भी रही है, लेकिन उसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसके साथ करीब 150 इकाइयां ऐसी हैं, जिनको अनुदान जारी करने के लिए एसएलएससी (राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति) की बैठक का इंतजार कर रही हैं।
नागौर जिले की बात करें तो जिले में कुल 75 यूनिट इस नीति के तहत स्थापित की गई हैं, जिनमें 250 करोड़ का निवेश किया गया है और 19.08 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया जा चुका है।
गौरतलब है कि अशोक गहलोत सरकार ने दिसम्बर 2019 में राज्य में कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, किसानों की आय दोगुनी करने, फसल कटाई के बाद नुकसान कम करना और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019’ शुरू की थी। सरकार का दावा था कि यह नीति आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। इसके तहत प्रसंस्करण इकाइयों, संग्रहण केन्द्रों, पैक हाउस, वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज एवं रीफर वैन की स्थापना करने का प्रावधान रखा गया।
नीति की मुख्य विशेषताएं और प्रावधान
उद्देश्य: राजस्थान को कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों का हब बनाना, क्लस्टर-आधारित विकास और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना। मुख्य रूप से किसानों को कृषि उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित करना था। इसमें प्रदेश के किसानों की ओर से मेहनत से तैयार की गई फसल का मूल्य संवर्धन कर उन्हें इसका लाभ दिलाना था। यह नीति राज्य में कृषि-व्यवसाय और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही थी, जो रोजगार सृजन में भी सहायक थी, लेकिन भजनलाल सरकार ने पिछले दो साल से इस नीति के तहत नए के साथ पुरानी इकाइयों का बकाया अनुदान भी जारी नहीं किया।
अनुदान और सब्सिडी
पूंजीगत अनुदान: किसानों/कृषक संगठनों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम 1 करोड़ रुपए) और अन्य उद्यमियों को 25 प्रतिशत (अधिकतम 50 लाख रुपए) तक अनुदान।
ब्याज अनुदान: बैंक ऋण पर 5 वर्षों तक 5-6 प्रतिशत का ब्याज अनुदान।
पात्र क्षेत्र: फल-सब्जी प्रसंस्करण, मसालों का प्रसंस्करण, अनाज पिसाई, शहद प्रसंस्करण, हर्बल, दूध प्रसंस्करण, और कोल्ड चेन/वेयरहाउस विकास आदि।
निर्यात और परिवहन: कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए फ्रेट सब्सिडी (फ्रेश फल/सब्जी पर 10-20 लाख रुपए तक) और राज्य के बाहर परिवहन के लिए सब्सिडी।
अनुदान राशि जल्द जारी हो
‘राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019’ के तहत नागौर जिले व प्रदेशभर में लगे एग्रो आधारित उद्योगों की बकाया अनुदान राशि जल्द जारी की जानी चाहिए, ताकि योजना का लाभ मिल सके और किसानों की आय बढ़े।
- हीरालाल भाटी, अध्यक्ष, रीको आईआईडी सेंटर, नागौर
दिखवाता हूं
अनुदान राशि किस स्तर पर पेंडिंग है, मैं इसकी जानकारी लेकर दिखवाता हूं। सकारात्मक प्रयास करेंगे।
- देवेन्द्र कुमार, जिला कलक्टर, नागौर
Updated on:
23 Apr 2026 11:11 am
Published on:
23 Apr 2026 11:08 am
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
