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नागौर में 10 हजार किलो विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले में NIA का बड़ा एक्शन, ‘नर्सिंगकर्मी’ वाला राज खुला

Nagaur Explosives Case: नागौर जिले में जनवरी 2026 में भारी मात्रा में पकड़े गए अवैध विस्फोटक प्रकरण की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंची। टीम में शामिल अधिकारियों ने दिनभर यहां रुककर जानकारी जुटाई।

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नागौर

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Arvind Rao

Apr 23, 2026

Nagaur Explosives Case NIA exposes mastermind nurse disguise move to charge-sheet over 10 ton haul

नागौर में 10 हजार किलो बारूद मिलने के मामले में चार्जशीट पेश करने की तैयारी (फोटो- पत्रिका)

Nagaur Illegal Explosives Case: राजस्थान के नागौर जिले में भारी मात्रा में मिले विस्फोटक सामग्री के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी तफ्तीश पूरी कर ली है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने की कवायद तेज हो गई है।

बता दें कि इसी सिलसिले में बुधवार को NIA की चार सदस्यीय टीम नागौर कलेक्ट्रेट पहुंची और जिला मजिस्ट्रेट से कानूनी अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की।

जाने क्या है पूरा मामला?

बता दें कि 24 जनवरी 2026 को थांवला थाना क्षेत्र के हरसौर गांव में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस दौरान करीब 9,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट (187 कट्टों में), 8,750 डेटोनेटर और 18,000 मीटर फ्यूज वायर बरामद किया गया था।

बरामद विस्फोटक सामग्री की मात्रा लगभग 10 हजार किलोग्राम थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर खतरा माना गया। गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच NIA को सौंपी गई थी।

मास्टरमाइंड और सप्लाई चेन का खुलासा

जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड सुलेमान खान था, जो हरसौर का निवासी है और उस पर पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। सुलेमान के साथ इस अवैध कारोबार में कई लाइसेंसशुदा मैगजीन संचालक भी शामिल थे, जो अपने पद और लाइसेंस का दुरुपयोग कर रहे थे।

वहीं, देवराज मेड़तिया ने 2 साल पहले अपना लाइसेंस सरेंडर कर दिया था और कुचेरा में एक नर्सिंगकर्मी के रूप में काम करने लगा था। हालांकि, यह सिर्फ एक मुखौटा था। पर्दे के पीछे से वह पूरी सप्लाई चेन को मैनेज कर रहा था।

वहीं, बंसीलाल बंजारा (चित्तौड़गढ़), महेंद्र पाल सिंह और भरत कुमार (नागौर) अपने लाइसेंस की आड़ में सुलेमान को कम दामों पर अवैध बारूद बेचते थे, जिसे सुलेमान आगे ऊंचे दामों पर सप्लाई करता था।

कलेक्ट्रेट में NIA की हलचल

मंगलवार देर शाम गोपनीय तरीके से नागौर पहुंची NIA की टीम बुधवार को दिनभर कलेक्ट्रेट कार्यालय में डटी रही। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत किसी भी आरोपी पर कोर्ट में ट्रायल शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) की अनुमति अनिवार्य होती है।

NIA ने बारूद की प्रकृति, FSL रिपोर्ट और आरोपियों के बयानों के आधार पर पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं। अब जैसे ही जिला मजिस्ट्रेट से आधिकारिक मंजूरी मिलेगी, NIA विशेष अदालत में इन चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट (अभियोग पत्र) पेश करेगी। इसके बाद इस संवेदनशील मामले की न्यायिक सुनवाई शुरू हो सकेगी।