
आज चौपाल में हथाई सरू हुई अर खंखारो करता खींव जी कैवण लाग्या भाईडां, आज तो जोरदार मेह बरस्यो। खेत सूं लेय'र गांव ताणी एकोधार। हथाई में बैठ्या लोग अचंभो करता बोल्या अठै तो एक छांट ई कोनीं पड़ी। थे कद री अर कठै री बात कर रिया हो। खींव जी बोल्या आज री अर अठै री ई बात करूं। म्हैं अबार बरसतै में ई खेत सूं सीधो इण चौपाल में आयो हूं। पैंपरळां-पैंपरळां पाणी पड़्यो। खींव जी री बात सुण'र सुगनो एकदम उछळतो सो बोल्यो 'यार! लोगां नैं बावळा समझै है के? तूं बरसतै मेह में आयो जणा साव सूखो कियां? थारै तो एक बूंद ई लागेड़ी कोनीं।' खींवजी हंसण ढूक्यो। बाबोसा ई एकै कानीं बैठा दाढ़ी माथै हाथ फेर्यो अर मुळक्यो।
खींवजी बोल्या अरे भाई थे म्हनैं जाणो कोनीं के? म्हारी खिमता अजे ओळखी कोनीं थे। म्हैं आयो तो बरसतै मेह में ई हो पण साव सूखो इण वास्तै हूं कै 'छांट अठै तो बन्दो बठै'। अबै बताओ म्हैं भीजूं कियां? खींवजी तो चिलम हाथ में ली अर सुटको खींचण लाग्या अर बाबोसा बात सरू करी। बोल्या खींवै री बात समझ्या के? सगळा बोल्या गप्प मारै, साव कूड़ भाखै, इणमें समझण वाळी कुणसी बात है। बाबोसा बोल्या खैर एक बार इण बात नैं छोडो। अबार चुनाव रो चाळो है। रोजीनां न्यारा-न्यारा दळ अर न्यारा-न्यारा नेता गांव में आवै। पूरो गुवाड़ खचाखच भरीजै। मिनख नावड़ै ई कोनीं। आखो गांव भेळो हुवै। जे गांव वाळा कीं कम पड़ै तो आवण वाळा नेता 100-200 आदमी खुद सूं पैली बारै सूं भेज देवै। मायक, मंच एवं भाषण चाटण री सगळी व्यवस्था आगलो नेता आप कानीं सूं करै। गाड़ी-घोड़ा आवै। कोई ऊंट माथै, कोई घोड़ै माथै तो कोई हाथी रै होदै बैठै। मंच सूं भाषण देवै। समर्थन मांगै। सगळा लोग दोनूं हाथ खड़ा कर-कर समर्थन देवै। नेता नैं सुहावै बिसा नारा लगावै। बात-बात माथै ताळियां बजावै। नेता रै साथै फोटुवां खिंचावै। सेल्फी लेवै। सोशल मीडिया पर पोस्टां करै। आवण वाळो नेता इत्ता वोट भेळा देख'र बावळो हुयोड़ो सो पाछो जावै अर मन ई मन खुद री जीत रा सपनां संजोवै।
सभा संपूरण हुयां, नेता आगलै गांव जावै। दूजा बारै सूं आयोड़ा ई कित्ती देर रुकै, बै ई जाता रैवै। गांव वाळा तो कठै जावै। बठै ई बैठा बातां करै। एक बोलै भाई आज तो फलाणै री सभा में वोटां री बरसात हुई। सगळा कैवै हां भाई बात तो साची है पण इण बरसात में भीज्या किताक इण बात रो ठाह तो तीन दिसंबर नैं परिणाम आयां ई पड़सी।
इत्ती देर सूं चुपचाप बैठ्यो खींवजी उछळ'र बोल्यो अबै समझ्या के? म्हैं कुण हूं जको बरसतै मेह में ई सूखो रैय सकूं। म्हैं हिंदुस्तान रो आम मतदाता हूं, जको पैली सूं जाणूं कै म्हनैं वोट किण नैं देवणो है। नेता डाळ-डाळ है तो म्हैं पात-पात हूं। नेता वादां री छांटां बरसावै पण बंदा भीजै कोनीं। जाति, धरम अर संप्रदाय सूं भरमावण री खेंचळ करै पण म्हारै कीं फरक नीं पड़ै। म्हैं जाणूं कै देस रो भलो कुण करसी, म्हारै माथै वां छांटां रो ई असर हुवैला। बाकी तो छांट अठै अर बन्दो बठै। सगळा बोल्या आज तो खींवजी कमाल करग्यो। बाबोसा ई राजी हुया अर सगळां राम-राम कर घर री सुध करी।
- डॉ. गजादान चारण 'शक्तिसुत'