चौसला. ग्राम पंचायत प्रशासन ने मनरेगा श्रमिकों से राजपूत श्मशान भूमि में साफ-सफाई का काम शुरू करवाकर अच्छा काम किया है, लेकिन अन्य समाज के श्मशान स्थलों की खुदाई करवाकर लोगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है।
चौसला. ग्राम पंचायत प्रशासन ने मनरेगा श्रमिकों से राजपूत श्मशान भूमि में साफ-सफाई का काम शुरू करवाकर अच्छा काम किया है, लेकिन अन्य समाज के श्मशान स्थलों की खुदाई करवाकर लोगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। सालों से गंदगी में अटे पड़े राजपूत श्मशान भूमि की दुर्दशा सुधारने के लिए पंचायत प्रशासन अब नींद से जागा है। मनरेगा श्रमिकों द्वारा श्मशाम भूमि में ऊंचे-नीचे टीलों को समतल कर कंटीली झाडिय़ां काटी जा रही है। गौरतलब है कि आबादी के समीप राजपूत श्मशान भूमि में लोग अपने घरों का कूड़ा-कचरा डालकर ढ़ेर लगा दिए हैं। जंगली घास उगी होने से समाज के कई लोग शौच जाकर गंदगी फैला रहे है। इससे पास में रहने वालों लोगों का जीना ***** हो रहा है। साफ-सफाई का काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन अब देखना यह है कि पंचायत लोगों से कचरे के ढेर हटवाती है या नहीं। गंदगी का आलम यह है कि अंतिम संस्कार में आने वाले लोग भी कतराते है। वर्तमान में राजपूत श्मशान स्थलों की दुर्दशा ऐसी दयनीय है कि अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के लिए न तो बैठने के लिए छाया है ओर न ही पीने के लिए पानी। एकाध घंटा अंतिम संस्कार करने के लिए बैठने में दुर्गंध के कारण लोग परेशान हो जाते है। राजपूत समाज के लोगों ने बताया कि कुछ दिनों पहले कचरे के ढेर हटवाकर चारों तरफ तारबंदी करवा दी थी, लेकिन समाज कंटक के लोग तारबंदी को तोड़ कर कातले उखाड़ दिए तथा फिर कचरे के ढेर लगाने लग गए है।