टोंक

स्कूल तीन साल से मांग रहा मुआवजा, डीईओ ने कहा नहीं चाहिए तो कलक्टर ने भी कर दी फाइल बंद

सेठ किशनलाल कांकरिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान की जमीन पर रूडिप द्वारा बनाए गए टंकी निर्माण के बदले मुआवजा दिलवाने की बजाय माध्यमिक शिक्षा के डीईओ ने यह कहते हुए रोक लगा दी कि....
3 min read
• •
Updated: 30 Jul 2016, 11:17 AM IST
water tanki

हमें मुआवजे की आवश्यकता नहीं है, जबकि विद्यालय की विकास समिति पिछले तीन साल से मुआवजे के लिए प्रयास कर रही है। मुआवजे की आस लगाए बैठी विद्यालय विकास समिति के अरमानों पर उस वक्त पानी फिर गया जब जिला कलक्टर राजन विशाल ने उप शासन सचिव कार्यालय से आए पत्र के जवाब में यह लिख दिया कि डीईओ माध्यमिक शिक्षा का कहना है कि हमें मुआवजे की आवश्यकता नहीं। इसलिए इस प्रकारण को जिला प्रशासन स्तर पर समाप्त किया जाता है।


यूं समझे पूरे
मामले को
कांकरिया स्कूल के विकास समिति की मांग पर उप शासन सचिव दिनेश कुमार जांगिड़ ने जिला कलक्टर राजन विशाल को २३ जुलाई २०१५ को पत्र भेजकर कांकरिया स्कूल के खेल मैदान को रूडिप द्वारा लिए जाने पर मुआवजा दिलाए जाने वाले प्रकरण का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए उप शासन सचिव कार्यालय को अवगत कराने की बात कही। जिस पर कलक्टर ने पत्र के जवाब मे लिख दिया कि डीईओ को मुआवजे की जरूरत नहीं है।

यह है प्रकरण
वर्ष 1983 में विद्यालय ने किसी व्यक्तिसे छात्र निधि कोष से 1 लाख, 70 हजार 418 रुपए 50 पैसे में खरीदी थी जमीन
कुल खेल मैदान की जमीन साढ़े 4 हजार वर्गमीटर
इस जमीन पर करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन कलक्टर डॉ. समित शर्मा व रुडिप अधिकारियों ने पानी का टांका बनाने के नाम पर स्कूल प्राचार्य पर दबाव बनाकर मुफ्त में कब्जा कर लिया।


स्कूल के जागरूक व्याख्याता व्यास को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर जमीन का उचित मुआवजा या मासिक किराया दिलाने की मांग की। जिस पर सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों ने गत दिनों नागौर कलक्टर से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी।


पानी की टंकी बनाने के लिए 900 वर्गफीट जमीन मांगी, जबकि कब्जा 4500 वर्गफीट पर किया गया।
जमीन के बदले में 2 करोड़ 99 लाख 7० हजार रुपए मुआवजा या फिर एक लाख 89 हजार 459 रुपए मासिक किराया दिया जाना था।

यह है प्रकरण
वर्ष 1983 में विद्यालय ने किसी व्यक्तिसे छात्र निधि कोष से 1 लाख, 70 हजार 418 रुपए 50 पैसे में खरीदी थी जमीन


कुल खेल मैदान की जमीन साढ़े 4 हजार वर्गमीटर


इस जमीन पर करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन कलक्टर डॉ. समित शर्मा व रुडिप अधिकारियों ने पानी का टांका बनाने के नाम पर स्कूल प्राचार्य पर दबाव बनाकर मुफ्त में कब्जा कर लिया।


स्कूल के जागरूक व्याख्याता व्यास को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर जमीन का उचित मुआवजा या मासिक किराया दिलाने की मांग की। जिस पर सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों ने गत दिनों नागौर कलक्टर से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी।


पानी की टंकी बनाने के लिए 900 वर्गफीट जमीन मांगी, जबकि कब्जा 4500 वर्गफीट पर किया गया।


जमीन के बदले में 2 करोड़ 99 लाख 7० हजार रुपए मुआवजा या फिर एक लाख 89 हजार 459 रुपए मासिक किराया दिया जाना था।

विभागीय अधिकारियों ने नहीं दिखाई रुचि
&शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार बुलाकर इस प्रकारण के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा इसमें किसी प्रकार की रुचि नहीं दिखाई। जिस पर मैंने उप शासन सचिव को लिखे पत्र में जिला स्तर पर इस प्रकरण को समाप्त कर दिया है।
राजन विशाल, कलक्टर, नागौर


नाराज होकर कर दिया लेटर जारी
13 जून को इसी प्रकरण को लेकर कलक्टर से मिले थे। इस दौरान कलक्टर को सारे प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुए समस्या का समाधान करवाने की बात कही। जिस पर कलक्टर ने समस्या का निपटारा करने की बात कहते हुए कहा कि इस बारे में लिखूंगा, लेकिन 13 जून को कलक्टर सभागार में हुई बैठक में किसी कारणवश अनुपस्थित रहने पर एडीईओ गौरी शंकर को भेजा था, जो कलक्टर द्वारा पूछे गए सवाल का संतोषजनक जबाव नहीं दे सके। जिस पर कलक्टर ने नाराज होकर यह लेटर जारी कर दिया।
- सीताराम गर्ग, डीईओ, माध्यमिक शिक्षा, नागौर


मैंने नहीं कहा कि मुआवजे की आवश्यकता नहीं
&डीईओ की अनुपस्थिति में जिला कलक्टर सभागार में १३ जून को हुई बैठक के दौरान कलक्टर ने इस प्रकरण के बारे में जानकारी मांगी थी। जिस पर मैंने कलक्टर को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होने की बात कही। साथ ही उन्हें यह भी कहा कि डीईओ से मिलकर इस बारे में जानकारी उपलब्ध करवा दी जाएगी। मैंने एेसा कभी नहीं कहा कि हमें मुआवजे की आवश्यकता नहीं है।
- गौरी शंकर, एडीईओ, माध्यमिक शिक्षक, नागौर
गलती किसकी, सजा स्कूल को


&एडीईओ बैठक में क्या कहते हैं इस बारे में तो उन्हें ही पता होगा, लेकिन कलक्टर द्वारा एडीईओ के मुआवजा की जरूरत नहीं होने के बयान पर उपशासन सचिव को पत्र लिखकर मामले को जिला स्तर पर समाप्त कर दिया है। ये तो वो वाली बात हो गई गलती किसकी भुगते कोई और।
- शंकरलाल शर्मा, प्रधानाचार्य, सेठ किशनलाल कांकरिया स्कूल, नागौर

Published on: