
ऐसे में कई उपभोक्ताओं के बिलों में बरती जा रही लापरवाही के कारण रोष है। बेवजह उपभोक्ताओं को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। हाल ही में मेड़ता क्षेत्र के जसवंताबाद निवासी नाथूराम सांसी को सितम्बर के बिल में देखने को मिला। विद्युत निगम की ओर से दिए गए बिल में 80 हजार 2 सौ 26 रुपए का बिल थमा दिया। इतनी भारी भरकम राशि का बिल देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए। उपभोक्ता नाथूराम ने बताया कि वे सडक़ के किनारे बैठ कर जूती चप्पल मरम्मत कर दैनिक मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। घर में बिजली का इतना उपभोग नहीं है कि इतनी बड़ी राशि का बिल आए। घर में लगे बिजली के मीटर में सितम्बर में दिए गए बिल में कुल उपभोग यूनिट 2280 दर्शाए गए है। वास्तविकता में मीटर में अब तक के यूनिट 1168 है। इसके बावजूद भी विद्युत वितरण निगम लिमिटेड कार्मिकों गफलत में रहते हुए रीडिंग नोट कर ली गई।
यह है अब तक आए बिल में त्रुटियां
गत महीनों में बिल में दर्शाई गई खपत- मई में 6580 यूनिट, जून में 2242, सितम्बर में 2280 है। जबकि बिल देखने में पता चलता है कि गत पठन में शून्य एवं वर्तमान पठन में भी शून्य दिखाया गया है। इसके बावजूद भी उपभोक्ताओं को विभाग की ओर से एवरेज बिल थमाया जा रहा है। ऐसे अनेकों उपभोक्ताओं के बिलों में राशि की गड़बड़ी के चलते विभाग के चक्कर काटते नजर आते है। लेकिन विभाग की ओर से अब तक स्थाई रूप से कोई समाधान नहीं किया गया है। उपभोक्ता मीटर जांच में उलझ कर रह जाते है।
विभाग ने आनन फानन में किया सुधार
जब उपभोक्ता ने विभागीय अधिकारियों को भारी भरकम बिल आने पर दिखाया था। लेकिन विभागीय अधिकारी भी सकपका गए। विभाग ने कुल 80 हजार 2 सौ 26 रुपए के बिल में संशोधन कर 8 हजार 1 सौ 88 रुपए कर दिया। इस पर उपभोक्ता ने कनेक्शन कटने के भय से उक्त छह माह की राशि का बिल जमा करवा दिया।
नहीं की विभाग ने कनेक्शन विच्छेद की कार्रवाही
उपभोक्ता के गत छह महीने से भारी भरकम बिल थमाए जा रहे थे। ऐसे में उपभोक्ता ने उक्त बिल में आई राशि को भरन में सक्षम नहीं था। इसके वाबवूद भी विभाग ने उपभोक्ता के घरेलु कनेक्शन काटने की जहमत नहीं उठाई और ना ही किसी प्रकार का नोटिस दिया। अधिकांशतया ग्रामीण क्षेत्र में 5 हजार से अधिक राशि बकाया होने पर नोटिस थमा दिया जाता है। कनेक्शन विच्छेद करने की कार्रवाई कर दी जाती है।
इनका कहना है
बिल में कम्प्यूटर की गड़बड़ी रही है। मामला जानकारी में नहीं आया। उपभोक्ता की ओर से जानकारी देने के बाद बिल में अपेक्षित सुधार कर दिया गया है।
-एन.के. शर्मा सहायक अभियंता विद्युत वितरण निगम लिमिटेड मेड़ता।