
राजस्थान के पंचायत राज चुनावों में सोशल मीडिया के बड़े-बड़े चेहरों को लगातार झटके लग रहे हैं। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर लाखों-करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले जाने-माने इन्फ्लुएंसर और डिफेंस एकेडमी संचालक विराट चौधरी (असल नाम: धर्माराम) को भी सरपंच पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। डीडवाना-कुचामन जिले की किनसरिया ग्राम पंचायत से सरपंच पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे विराट चौधरी कड़े और रोमांचक मुकाबले में केवल 29 वोटों के अंतर से पराजित हो गए।
किनसरिया ग्राम पंचायत के चुनाव परिणाम दिलचस्प रहे, जहाँ जीत और हार का अंतर बहुत कम रहा:
विजयी उम्मीदवार: गजराज सिंह राठौड़ (जिन्हें कुल 886 वोट मिले)।
दूसरे स्थान पर रहे: विराट चौधरी (जिन्हें 857 वोट हासिल हुए)।
महज 29 वोटों के मामूली अंतर से शिकस्त मिलने के बाद इस चुनाव की चर्चा पूरे इलाके में 'रील लाइफ और रियल लाइफ (ग्राउंड रियलिटी)' के अंतर के एक बड़े उदाहरण के रूप में की जा रही है।
विराट चौधरी मुख्य रूप से अपने विज्ञापनों, डिफेंस ट्रेनिंग और सोशल मीडिया प्रेजेंस के कारण युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं। वे कुचामन सिटी में 'कमांडो डिफेंस एकेडमी' का संचालन करते हैं, जहाँ वे युवाओं को सेना और पुलिस भर्ती के लिए फिजिकल और लिखित परीक्षा की तैयारी कराते हैं। वे कुचामन में 'विराट चौधरी चिल्ड्रन एकेडमी स्कूल' भी चलाते हैं। वे खुद भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं, जिसके चलते देशप्रेम, अनुशासन और फिटनेस से जुड़े उनके वीडियो युवाओं को बहुत आकर्षित करते हैं।
विराट चौधरी के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रशंसकों की लंबी फौज है:
फेसबुक: 3.7 मिलियन फॉलोअर्स
इंस्टाग्राम: मुख्य हैंडल (@v_c_a_kuchaman_city) पर 2.24 लाख से अधिक फॉलोअर्स
यूट्यूब: 'वीसीए स्कूल' चैनल पर 10.5 मिलियन और 'कमांडो एकेडमी' चैनल पर 2.72 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स जुड़े हुए हैं।
राजस्थान में किसी बड़े सोशल मीडिया स्टार या यूट्यूबर की यह पहली चुनावी हार नहीं है। इससे पहले भी पंचायत चुनावों में डिजिटल दुनिया के दिग्गजों को जमीन पर मात खानी पड़ी है।
पवन साहू की पत्नी (भीलवाड़ा): शाहपुरा पंचायत समिति की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत से देश के जाने-माने फिटनेस यूट्यूबर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू को भी हार का सामना करना पड़ा था।
ओमप्रकाश बिश्नोई (जोधपुर): ओसियां तहसील से चुनाव लड़ने वाले लोकप्रिय यूट्यूबर ओमप्रकाश बिश्नोई को अपने ही गांव के मतदाताओं का समर्थन नहीं मिला और 1,600 मतदाताओं वाले गांव में उन्हें सिर्फ 33 वोटों से संतोष करना पड़ा था।
यह ट्रेंड साफ दर्शाता है कि सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया की लोकप्रियता और जमीनी राजनीतिक समीकरणों में जमीन-आसमान का फर्क होता है।