
नागौर. श्रीराम जन्म भूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए चल रहे संपर्क अभियान पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महंत भागीरथराम शास्त्री ने कहा कि भारतीय आदिकालीन श्रेष्ठ जीवन मूल्य, पद्धति व व्यवस्था आज भी जारी है। केवल इसे युगानुकूल करने की जिम्मेदारी हम सब की है। विश्व में एक मात्र भारत ऐसा देश है जहां अतिथि देवो भव का भाव सदा से श्रद्धा का विषय रहा है। आज भारत के योग की की गूंज विश्व में प्रभावी रूप से व्यक्त हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत माता, सरस्वती, लक्ष्मी व दुर्गा का समन्वित रूप है। मंदिर, मठ, गुरुद्वारा केवल मूर्ति पूजा के प्रतीक नहीं है, बल्कि हमारे गौरव पूर्ण मर्यादा के प्रतीक हैं। नंदलाल बाबाजी ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। विश्व हिन्दू परिषद के जोधपुर प्रान्त संगठन मंत्री राजेश कुमार ने कहा कि मुगल काल में भारत में अनेक मंदिर इस योजना से तोड़े गये ताकि मंदिर तोडऩे के माध्यम से हिंदू का विश्वास, श्रद्धा और जीवन मूल्य टूट जाएगा। अंग्रेजों के समय में भी शिक्षा के माध्यम से ही मंदिरों को अधिग्रहण करके इस विश्वास को तोडऩे का कार्य किया गया। प्रयास है कि मंदिर सरकारी अधिग्रहण से मुक्त हो। इसके पूर्व काल में भी मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना से खड़े रहे। सभी स्थानों पर मंदिर आधारित वेद शाला गोशाला आदि संचालित हो। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के माध्यम से युवा शक्ति को नशे से बचाने, लव जिहाद से बचने के लिए हिंदू बालिकाओं को भारत के मूल परंपरा के संस्कारों पर खड़ा करने की आवश्यकता पर बल दिया। विहिप के जिलाध्यक्ष रामेश्वर सारस्वत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महंत कमलेश भारती, महंत प्रकाश ओझा, मेघराज राव, विभाग प्रचारक गिरधारीलाल, धर्म प्रसार प्रमुख राधेश्याम टोगसिया, प्रताप सिंह राजपुरोहित, कोषाध्यक्ष गणेश त्रिवेदी, प्रांत के सत्संग प्रमुख पुखराज सांखला, विभाग के संगठन मंत्री कुलदीप शर्मा, बजरंग दल के हरिकिशन चौधरी, देवेंद्र टाक, अनिल खदाव, सुशील झाड़वाल, सुरेश अटल, नीलू खड़लोहिया, अनुपमा शर्मा, दुर्गा वाहिनी की माया सांखला, कविता सांखला, सरिता राव, बबीता बेनीवाल, महावीर गौ सेवा समिति के बलदेव सांखला आदि मौजूद थे।