नागौर

VIDEO…कैचमेंट एरिया में हुए पक्के निर्माणों ने प्रतापसागर तालाब को भी बना दिया पोखर

-पिछले दस से 12 सालों में हुए पक्के निर्माणों के चलते तालाब का कैचमेंट एरिया हो गया समाप्त
3 min read
• •
Dec 19, 2023
Nagaur news
The concrete constructions done in the catchment area also turned Pratapsagar pond into a puddle

-तालाब आवक के रास्तों पर हुए निर्माणों ने रोका बारिश का पानी, अब बरसात का पानी तालाब तक नहीं पहुंच पाता, फिर भी प्रशासनिक अधिकारियों को पता नहीं कि तालाब का कैचमेंट एरिया हो गायब हो गया
अभियान...
नागौर. शहर के अन्य तालाबों की तर्ज पर प्रतापसागर तालाब का कैचमेंट एरिया भी पक्के निर्माणों की बलि चढ़ गया है। इसके कैचमेंट एरिया में हुए सैंकड़ों की संख्या में पक्के निर्माणों की वजह से कैचमेंट एरिया अब नजर भी नहीं आता है। बताते हैं कि यह पक्के निर्माण इस तालाब के चारों ओर के कैचमेंट एरिया में किए गए हैं। इतने निर्माणों के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुका है, बल्कि कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण इसकी संख्या में और ज्यादा बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
बरसाती पानी की आवक पर लगी लगाम
शहर के प्रमुख तालाबों में शामिल प्रतापसागर तालाब का का जलबंध एरिया खत्म हो गया, और प्रशासन को पता भी नहीं चला। इसके चलते न केवल तालाब की प्रकृति ही नहीं बदली गई, बल्कि पूरा जलबंध एरिया ही खत्म कर दिया गया। इसकी वजह से बारिश के दौरान होने वाली बरसाती पानी के आवक पर अब लगाम लग चुकी है। हालांकि बारिश तो अब भी होती है, लेकिन इसका कैचमेंट एरिया नहीं होने के कारण यह पूरा तालाब लगभग खाली ही रहता है। जानकारों की माने तो पिछले दस से पंद्रह वर्षों के दौरान कैचमेंट एरिया में हुए निर्माणों की आई बाढ़ ने तालाब में बरसाती पानी की आवक पर पूरी तरह से रोक ही लगा दी। स्थिति यह है कि इसके आसपास हुए निर्माणों की वजह से न केवल जलबंध एरिया खत्म हो गया, बल्कि यह इसका आकार भी एक छोटे पोखर की तरह हो चुका
इस तरह से इसमें बरसात के पानी की हो रही थी आवक
प्रतापसागर तालाब में बरसाती पानी की आवक इसके आसपास के कैचमेंट एरिया से होती थी। बताते हैं कि पहले इसमें आवक के रास्तों की संख्या दर्जनों में थी। अब सभी आवक लगभग बंद हो चुके हैं। इसके चलते अब तालाब अब पूरा कभी भर ही नहीं पाता है। प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो तालाब के कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह का पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी पड़ताल के दौरान में यह सारे पक्के निर्माण सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना के साथ ही अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाते नजर आए।
अब दर्जनों की संख्या में बारिश भी नहीं भर पाती है यह तालाब
पड़ताल के दौरान सामने आया कि पहले यह प्रतापसागर तालाब ज्यादा से ज्यादा दो बार की बारिश में ही लगभग पूरा भर जाता था। अब ऐसा बिलकुल नहीं रहा। बताते हैं कि पिछले कई सालों से प्रतापसागर तालाब पूरा भरा नजर नहीं आया। इस संबंध में प्रतापसागर तालाब पार्क में मिले अनुज, चंदन, हंसराज एवं मांगीलाल आदि से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि वह लोग बरसों से तालाब के किनारे टहलते चले आ रहे र्हैं। यह पार्क भी उनके सामने ही बना। पहले तालाब का एरिया वर्तमान की अपेक्षा तीन गुना ज्यादा था। इसकी गहराई चार से पांच हाथियों के बराबर रहती थी। इसके अंदर कुएं भी थे। तालाब के पानी से आसपास का भूभाग भी रिचार्ज होता रहता था। काफी साल हो गए यह तालाब कभी भरा ही नहीं, हालांकि यह बीच में कई बार जो भरा तो वह गंदे पानी की आवक के कारण। अब मूल तालाब का स्वरूप लगभग खत्म हो चुका है। इस समय भी तालाब में नजर आ रहा पानी नाला का पानी है। इस स्थिति से वह बेहद अफसोज करते नजर आए।
इनका कहना है...
तालाब के कैचमेंट एरिया में निर्माणों की कोई जानकारी नहीं है, और न ही इस तरह की कोई शिकायत अभी फिलहाल आई है। फिर भी इसकी जांच करा ली जाएगी। प्रावधानों का पूरा पालन कराया जाएगा।
रामेश्वर गढ़वाल, तहसीलदार नागौर

Updated on:
19 Dec 2023 09:39 pm
Published on:
19 Dec 2023 09:39 pm