
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला मे अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ शाखा के तत्वाधान मे चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत समणी निर्देशिका डॉ. सुयशनिधि, समणी सुगमनिधि, समणी सुधननिधि, समणी सुयोगनिधि, समणी श्रद्धानिधि ठाणा 5 के सानिध्य मे मंगलवार से ओली तप प्रारंभ होंगे। प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए समणी सुगमनिधि ने कहा कि दो प्रकार की वाणी होती है, एक जिनवाणी दूसरी जनवाणी। जिनवाणी साधक को आत्म उत्थान कराने वाली होती है एवं जनवाणी केवल मनोरंजन के लिए होती है। जिनवाणी सुनने से साधक आत्मसत्त कर लेता है। सुनने वाला श्रोता कहलाता है। समणी ने कहा कि तीन प्रकार के श्रोता बताए गए है। प्रथम श्रोता गर्म तवे के समान होता है। ऐसे श्रोता के कानों में शास्त्रों के शब्द पड़ते है, लेकिन भीतर जाने के बजाय वे अनसुना कर देते है। ऐसे श्रोता अपने आचरण में परिवर्तन नहीं कर पाते है। दूसरा श्रोता कमल के समान होता है। ऐसे श्रोता शास्त्र सुनने के बाद कुछ समय तक हृदय में धारण करते हैं। शंका आते ही त्याग, व्रत, सम्यक्तव आदि से विचलित हो जाते है। तीसरा श्रोता सीप के समान होता है। ऐसे श्रोता त्याग, व्रत धारण करने के बाद परीषह से विचलित नहीं होते। चार दुर्लभ अंग में जिनवाणी श्रवण करना भी दुर्लभ बताया हैं ।
इस अवसर पर प्रवचन की प्रभावना के लाभार्थी ताराचंद, निर्मलचंद, नरपतचंद, सुशीलकुमार चौरडिय़ा परिवार रहा। दर्शन प्रतिमा के लाभार्थी मदनदेवी ललवानी परिवार बैंगलोर रहा।
चाँदनी बागमार ने बताया कि प्रवचन में पुछे गए तीन प्रश्नों के उत्तर दिलीप पींचाएएमण्मनोज ललवानीएलीला देवी लोढ़ा ने दिए।उत्तर देने वालों को चेतनप्रकाश डूंगरवाल परिवार बैंगलोर की तरफ़ से पाँच.पाँच ग्राम के चाँदी के सिक्के से सम्मानित किया गया।इस मौक़े पर प्रकाशचंद बोहराएलालचंद ललवानीएमेघराज चौरडयि़ाएज्ञानचंद माली आदि उपस्थित रहें।