
नागौर. राज्य सरकार की ओर से हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधरोपण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन नागौर में सरकारी विभाग ही अभियान की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विभिन्न विभागों की ओर से पौधरोपण के नाम पर खानापूर्ति करने के आरोप लग रहे हैं। सरकार ने लगाए गए पौधों की जीओ टैगिंग के निर्देश भी दिए हैं, लेकिन मौके पर पौधों की गुणवत्ता और उनकी देखरेख को लेकर जिम्मेदार गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
पौधरोपण की खानापूर्ति का ताजा मामला बालवा रोड स्थित राजस्थान हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में सामने आया है। यहां हाउसिंग बोर्ड (आवासन मंडल) की ओर से पौधे लगाए जा रहे हैं। मौके पर कई पौधे ऐसे हैं, जिनके पत्ते पूरी तरह सूख गए। पौधे जले हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद पौधों का रोपण किया जा रहा है। इससे सवाल उठता है है कि जब लाखों रुपए खर्च कर पौधे लगाए जा रहे हैं तो हरे-भरे और स्वस्थ पौधों के बजाय सूखे पौधे लगाने की जरूरत क्यों पड़ी।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पौधे जले हुए नहीं हैं, बल्कि उनके पत्ते सूखे हुए हैं। खाद और पानी देने के बाद पौधे फिर से हरे हो जाएंगे। अधिकारियों का यह तर्क भी सवालों के घेरे में है। यदि पौधरोपण का उद्देश्य क्षेत्र में अधिक से अधिक हरियाली विकसित करना है तो शुरुआत में ही स्वस्थ पौधे लगाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। सूखे पौधे लगाने के बाद उनके दोबारा विकसित होने का इंतजार करने से अभियान की गति और उद्देश्य दोनों प्रभावित होते हैं।
ठेकेदार की पांच साल की गारंटी
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पौधरोपण का ठेका दिया गया है और ठेकेदार की पांच साल की गारंटी है। इस अवधि में जो पौधे नष्ट होंगे, उनके स्थान पर नए पौधे लगाए जाएंगे। लेकिन शुरुआत में ही स्वस्थ पौधे लगाए जाएं और उनकी नियमित देखभाल हो तो पौधों के बार-बार बदलने की नौबत ही नहीं आएगी। इससे न केवल सरकारी राशि का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि पेड़ भी जल्द विकसित होकर क्षेत्र में हरियाली बढ़ाएंगे।
पद खाली, कामकाज भी प्रभावित
हाउसिंग बोर्ड का स्थानीय कार्यालय भी इन दिनों अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। करीब एक महीने से यहां आवासीय अभियंता का पद खाली पड़ा है। पूर्व में कार्यरत आवासीय अभियंता का पिछले महीने तबादला हो गया था। उनके स्थान पर अब तक किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके कारण हाउसिंग बोर्ड से जुड़े कई काम प्रभावित हो रहे हैं और आवंटियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
पिछले साल लगाए पौधे भी जल गए
हाउसिंग बोर्ड की ओर से पिछले साल भी बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे, लेकिन सुरक्षा और नियमित देखरेख के अभाव में इनमें से ज्यादातर पौधे नष्ट हो गए। पौधरोपण के बाद उनकी पर्याप्त देखभाल नहीं की गई। पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें पेड़ बनने तक बचाना और उनकी नियमित देखभाल करना ही हरियालो राजस्थान अभियान की वास्तविक सफलता होगी।
ठेकेदार को दूसरे लगाने होंगे
पौधे जले हुए नहीं हैं। पुराने होने के कारण पत्ते सूख गए होंगे, खाद-पानी देंगे तो वापस हरे हो जाएंगे। वैसे भी ठेकेदार की पांच साल की गारंटी है, जो पौधे जल जाएंगे, उनके स्थान पर दूसरे लगाने पड़ेंगे।
- पृथ्वीसिंह, उप आवासन आयुक्त, राजस्थान आवासन मंडल, बीकानेर