
-रामदेव पशु मेला के घटते क्रेज को लेकर व्यापारियों से हुई बातचीत में सामने आया सामने मेला के प्रोत्साहन के लिए अब खानापूर्ति करने की जगह बेहतर ठोस और योजनापरक कदम होंगे, तभी बनेगी बात, रामदेव पशु मेला से पशु पालकों के साथ ही आम को भी जोडऩे की वकालत, मेला को नए कलेवर में बसाने पर दिया गया बल
नागौर. पशु प्रदर्शनी स्थल पर हर साल लगने वाले विश्वस्तरीय रामदेव पशु मेला के घटते क्रेज को लेकर व्यापारी भी चिङ्क्षतत हैं। व्यापारियों की माने तो मेला यहां पर लाखों की भीड् के साथ लगता था तो स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलने के साथ ही पशुपालन विभाग को भी इसका राजस्व मिलता था। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों से आने वाले व्यापारियों के लिए यह मेला स्थल एक मंच स्थल के रूप में काम करता था।
एक लाख से ज्यादा पशु जुटते थे मैदान
रामदेव पशु मेला के घटते क्रेज को लेकर शहर के अनाज मंडी के व्यापारियों से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि कभी यहां पर एक लाख से ज्यादा पशु एकत्रित होते थे। मेला मैदान में आने-जाने की जगह बनाने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ता था। पशु मेला पशु प्रदर्शनी स्थल के साथ ही इसके निकट के खाली मैदानों में भी लगता था। गोवंश तो पशु प्रदर्शनी स्थल पर रहते थे, और घोड़े सहित अन्य जानवर जोधपुर रोड से सटे मैदान के साथ ही नाडी के पास वाले खाली मैदान पर भी रहते थे। उस दौरान यह जोधपुर रोड पूरी तरह से पशुओं से गुलजार नजर आता था अब ऐसा नहीं रहा।
व्यापारी बोले: पशु मेला से सभी को जोडऩे का काम करना चाहिए
मेला में पशुओं के परिवहन के लिए गुड्स ट्रेन संचालन के साथ ही पशु पालकों को बेहतर सुविधाएं देनी चाहिए। यहां पर अभी सुविधाओं के नाम पर पालकों एवं उनके पशुओं के बेहतर रूप से रहने के लिए कुछ खास नहीं दिया जाता है। केवल जमीन देने से काम नहीं चलेगा।
पवन भट्टड़, व्यापारी, कृषि उपजमंडी नागौर
रामदेव पशु मेला से लोगों को केवल रोजगार ही नहीं मिलता था, बल्कि यहां पर आने वाले पशुपालकों को भी अत्याधिक लाभ मिलता था। हालांकि अब ऐसा नहीं रहा। इसके लिए जरूरी है कि मेला को रोजगार परक बनाना होगा। पशुपालकों को पशुपालन एवं कृषि आदि से जुड़े विषयों की जानकारी बेहतर रूप से देने के साथ ही मार्केटिंग के गुर सिखाने के लिए यहां पर गतिविधियां की जानी चाहिए।
गुलाब देवड़ा, व्यापारी, कृषि उपजमंडी नागौर
अब तो खेती कार्यों में भी अत्याधुनिक संयंत्रों का उपयोग होने लगा है। इससे पशुओं की वैल्यु घटी है, लेकिन पशुओं के उपयोग कराने के नवीन तरीकों के साथ ही इसकी विशेषताएं लोगों को समझानी होगी। पहले पशुओं से खेती होती थी तो इससे न केवल प्राकृतिक रूप से खाद मिलती थी, बल्कि खेतों में जैविक उत्पादन भी बेहतर होता था।
श्रवण शर्मा, व्यापारी, कृषि उपजमंडी, नागौर
रामदेव पशु मेला में मूलभूत सुविधाओं में प्रशासन की ओर से पशुपालकों को सुविधाओं की स्थिति देखें तो कुछ खास नहीं मिलता है। यहां पर मेले में पशु चिकित्सक तो रहते हैं, लेकिन बेहतर रूप से चिकित्सा व्यवस्था के लिए चिकित्सकों की पूरी टीम होनी चाहिए। दिलचस्पी होनी चाहिए।
देवकिशन सोलंकी, व्यापारी, कृषि उपजमंडी नागौर