नागौर

Unique Mayra: फिर चर्चा में आया नागौर का अनूठा मायरा, मुस्लिम बहन के भात भरने पहुंचा हिंदू भाई तो चौंक गया हर कोई, होने लगी तारीफ

Unique Example Of Hindu-Muslim Unity: हिंदू भाई ने मुस्लिम बहन ने साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की। हिंदू भाई ने मुस्लिम बहन के यहां भात भरकर न केवल रिश्तों का फर्ज निभाया, बल्कि समाज को भाईचारे का संदेश भी दिया।

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Mar 31, 2026
हरसोलाव में मुस्लिम बहन के भात भरते जाट समाज के लोग (फोटो: पत्रिका)

Bhaat By Hindu Brother In Muslim Wedding: राजस्थान में नागौर जिले के मायरे हमेशा से चर्चा का विषय रहते हैं। यहां करोड़ों रुपए के मायरे भरे जाते हैं साथ ही कोई बैलगाड़ी तो कुछ ट्रेक्टर से भात लेकर शादी में पहुंचते हैं। वहीं नागौर के ही हरसोलाव गांव में फिर एक मायरा चर्चा का विषय बन गया। दरअसल हिंदू भाई ने मुस्लिम बहन ने साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की। हिंदू भाई ने मुस्लिम बहन के यहां भात भरकर न केवल रिश्तों का फर्ज निभाया, बल्कि समाज को भाईचारे का संदेश भी दिया।

नारधणियों की ढाणी निवासी परसाराम रविवार शाम अपने साथियों के साथ नागौर जिले के हरसोलाव गांव में रहने वाली अपनी मुस्लिम धर्म बहन शबाना बानो के यहां पहुंचे और मायरा भरकर शादी के सभी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्हें भात भरता देख सभी ने इस रिश्ते की तहेदिल से सराहना की।

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11 साल पहले बना धर्म का रिश्ता

हरसोलाव निवासी कमाल खान की पत्नी शबाना बानो ने करीब 11 साल पहले परसाराम को धर्म भाई बनाया था, तभी से यह रिश्ता निरंतर निभाया जा रहा है।

शबाना का ससुराल इग्यास गांव में है। लेकिन वर्तमान में परिवार हरसोलाव में रह रहा है। उनके बेटे और बेटी की शादी में भाई परसाराम ने पूरे रीति-रिवाज के साथ मायरा भरकर रिश्ते का फर्ज निभाया। परसाराम और उनके साथ आए समाजबंधुओं ने 7,100 रुपए नकद व उपहार भेंट किए।

हरसोलाव में मुस्लिम बहन के भात भरते जाट समाज के लोग (फोटो: पत्रिका)

इस मौके पर रामनिवास जांणी, धर्मेंद्र नारधणियां, वीरेंद्र नारधणियां, सुरेश नारधणियां, कादर खान, शंकर खान सहित कई मौजिज लोग मौजूद रहे। सभी ने शादी के आयोजन में सहयोग किया ।

रिश्तों में कभी मजहब आड़े नहीं आया

परसाराम के छोटे भाई सुखदेव नारधणियां ने कहा कि उन्हें यह महसूस ही नहीं हुआ कि वे मुस्लिम परिवार में भात भर रहे हैं, वहीं शबाना बानो ने भावुकता से कहा कि उनके रिश्ते में कभी मजहब बीच में नहीं आया, हमेशा भाई-बहन का प्यार ही प्राथमिक रहा।

गांव में हर तरफ सराहना

आज के दौर में कई जगह साम्प्रदायिक तनाव की खबरें सामने आती हैं, वहीं हरसोलाव की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। जाट समाज के लोगों ने मुस्लिम परिवार में मायरा भरने की इस पहल की काफी सराहना हो रही है। इससे स्पष्ट है कि आपसी प्रेम, विश्वास और रिश्तों की डोर मजहब से कहीं ऊपर है।

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Updated on:
31 Mar 2026 08:12 am
Published on:
31 Mar 2026 08:11 am
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