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मेडिकल स्टूडेंट की पढ़ाई पर संकट, ठेकेदार ने रोका नागौर कॉलेज का निर्माण

हॉस्टल सहित एकेडमिक ब्लॉक का काम अधूरा , स्टूडेंट झेल रहे परेशानी, कॉलेज में दो बैच का हो चुका प्रवेश, लैब अधूरे होने से प्रेक्टिकल में मुश्किल, जिम्मेदारों ने सरकार को पत्र भेजकर कराया अवगत, कोई कार्रवाई नहीं

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ऐसा बनना था नागौर मेडिकल कॉलेज का भवन

ऐसा बनना था नागौर मेडिकल कॉलेज का भवन, जिम्मेदारों ने नक्शा ही बदल दिया

नागौर. जिला मुख्यालय पर करोड़ों की लागत से बन रहा सरकारी मेडिकल कॉलेज का भवन फिर अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया। निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार की ओर से कार्य बीच में रोक देने से एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल और प्रयोगशालाओं का निर्माण अधूरा पड़ा है। इसका सीधा असर यहां अध्ययनरत मेडिकल स्टूडेंट की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कॉलेज में दो बैच का प्रवेश हो चुका है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं आज तर पूरी नहीं हुई।

18 माह में पूरा करना था कार्य

करीब 325 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास 9 मार्च 2022 को किया गया था। निर्माण कार्य को 18 माह में पूरा किया जाना था, लेकिन 18 माह की जगह 48 महीने बीतने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान हालातों को देखते हुए आगामी 18 माह में भी यह काम पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

परियोजना अधूरी

गौरतलब है कि नागौर मेडिकल कॉलेज को दिसम्बर 2019 में स्वीकृति मिली थी, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करनी थी। स्वीकृति के करीब ढाई वर्ष बाद मई 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन अब तक यह परियोजना अधूरी है।

स्थाई शिक्षकों की कमी

मेडिकल कॉलेज निर्माण में देरी के साथ स्थाई शिक्षकों की कमी भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमैस) की ओर से अब तक पर्याप्त असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त नहीं किए गए हैं। इससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। खासतौर पर एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को इसका सीधा खमियाजा भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें न तो पूरी सैद्धांतिक पढ़ाई मिल पा रही है और न ही आवश्यक व्यावहारिक प्रशिक्षण।

प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाएं संचालित

कॉलेज को एमबीबीएस की 100 सीटों के लिए संबद्धता मिल चुकी है। प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। हालांकि, अधूरी लैब और संसाधनों के अभाव में विद्यार्थियों को न तो नियमित सैद्धांतिक पढ़ाई मिल पा रही है और न ही जरूरी प्रायोगिक प्रशिक्षण। द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई में विशेष दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रयोगशालाएं तैयार नहीं होने से उन्हें प्रथम वर्ष की लैब में ही प्रैक्टिकल करने पड़ रहे हैं।

स्टूडेंट में असंतोष

इधर, स्टूडेंट में असंतोष बढ़ने लगा है। हालांकि वे खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि अधूरी सुविधाओं के बीच पढ़ाई करना भविष्य के साथ समझौता करने जैसा है। यदि समय रहते निर्माण कार्य और शिक्षण व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आगामी शैक्षणिक सत्र भी प्रभावित हो सकता है।

इधर, निर्माण एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि संवेदक के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मेडिकल कॉलेज का अधूरा निर्माण न केवल विद्यार्थियों के भविष्य पर असर डाल रहा है, बल्कि जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीदों को भी झटका दे रहा है।

उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है

कॉलेज परिसर में भवन का निर्माण कार्य काफी समय से बंद है। इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी है। आगे की कार्रवाई उनके स्तर पर होगी।

डॉ. डीके देवड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, नागौर।