
Government english school
नागौर. प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) और स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल अब एक नई चुनौती से जूझ रहे हैं। दसवीं कक्षा तक इन स्कूलों में नामांकन संतोषजनक रहने के बावजूद 11वीं और 12वीं में कक्षाएं खाली होती जा रही हैं। इसका मुख्य कारण व्याख्याताओं के पद रिक्त होना और विद्यार्थियों का फाउंडेशन कोर्स के लिए कोटा व सीकर जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों की ओर रुख करना है।
फिलहाल, अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में शुरू की गई पहल को बनाए रखने के लिए सरकार को जल्द ही ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा वरिष्ठ कक्षाओं में खाली होती सीटें आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
फाउंडेशन कोर्स बना बड़ा कारण
नीट, जेईई जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्र-छात्राएं 10वीं के बाद ही कोचिंग हब की ओर रुख कर रहे हैं। कोटा और सीकर में संचालित फाउंडेशन कोर्स को लेकर अभिभावकों में बढ़ती जागरूकता के चलते बड़ी संख्या में विद्यार्थी 11वीं में स्थानीय स्तर पर प्रवेश लेने की बजाए टीसी कटवाकर बाहर चले जाते हैं। इसका सीधा असर सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की वरिष्ठ कक्षाओं पर पड़ रहा है।
आंकड़े बता रहे चिंताजनक स्थिति
विधानसभा में विधायक महंत बालकनाथ की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं, वे स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। प्रदेश में कुल 3737 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित हैं, जिनमें 6,81,838 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यानी प्रति स्कूल औसतन केवल 182 विद्यार्थी हैं। वहीं 134 स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों में 62,291 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जहां प्रति स्कूल औसत नामांकन 464 है। यानी मॉडल स्कूलों की तुलना में महात्मा गांधी स्कूलों में नामांकन आधे से भी कम है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि सरकार ने अंग्रेजी माध्यम के नाम से स्कूल तो खूब खोल दिए, लेकिन उनमें व्याख्याताओं के पद नहीं भरे।
शिक्षकों की कमी भी बनी समस्या
महात्मा गांधी स्कूलों में कुल 49,522 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें 31,993 अंग्रेजी माध्यम और 17,529 हिंदी माध्यम के शिक्षक शामिल हैं। औसतन प्रति स्कूल केवल 13 शिक्षक उपलब्ध हैं। वहीं मॉडल स्कूलों में प्रति स्कूल करीब 19 शिक्षक हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वरिष्ठ कक्षाओं में विषय विशेषज्ञ व्याख्याताओं की कमी के कारण विद्यार्थी निजी विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
नागौर समेत अन्य जिलों में भी समान हालात
यह स्थिति केवल नागौर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशभर के सरकारी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में देखने को मिल रही है। यहां तक कि केन्द्रीय विद्यालय और अन्य सरकारी स्कूलों में भी 10वीं के बाद विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है।
नीतिगत बदलाव की जरूरत
शिक्षाविदों का मानना है कि यदि 11वीं-12वीं स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विषय विशेषज्ञ शिक्षक और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएं, तो विद्यार्थियों का पलायन रोका जा सकता है।
Updated on:
28 Mar 2026 11:43 am
Published on:
28 Mar 2026 11:42 am
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