गत वर्ष की तुलना में इस बार कम दर्ज हुए मुकदमे, झूठे मुकदमों की संख्या में भी हुआ इजाफा
नागौर. जिले के पुलिस महकमे के लिए 2017 का साल गत वर्ष की तुलना में काफी ठीक रहा। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो पिछले दो सालों में बजाए इस बार मुकदमों की संख्या कम रही। दूसरा, झूठे मुकदमों की संख्या भी ज्यादा रही, जिससे यह भी नहीं कहा जा सकता कि पुलिस ने थाने की चौखट पर आने वाले व्यक्ति को मुकदमा दर्ज किए बिना लौटाया हो। इसके साथ पुलिस ने चालान पेश करने में भी चुस्ती दिखाई। इस वर्ष गत दो वर्ष की तुलना में चालान पेश करने का प्रतिशत अधिक रहा।
यानी कुछ घटनाओं को छोड़ दें तो वर्ष 2017 नागौर पुलिस के लिए उपलब्धियों भरा रहा, जिसमें सबसे बड़ी उपलब्धि गैंगस्टर आनंदपाल का एनकाउण्टर रहा, जो नागौर ही नहीं पूरे प्रदेश के लिए सिर दर्द बन चुका था। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस की भी किरकिरी हुई। श्रीबालाजी थानाधिकारी पूर्णमल मीणा की मौत या फिर जसवंतढ़ पुलिस पर फायरिंग का मामला हो। इसी प्रकार परिवादियों एवं आरोपितों से रिश्वत लेने के ओडियो व वीडियो भी खूब वायरल हुए।
मुकदमों की तुलनात्मक स्थिति
अपराध - 2017 - 2016
डकैती - 2 - 3
लूट - 23 - 15
हत्या - 49 - 44
हत्या का प्रयास - 44 - 69
नकबजनी- 175 - 209
चोरी - 540 - 587
बलात्कार - 94 - 92
अपहरण - 176 - 127
अन्य आईपीसी - 3682 - 3728
कुल आईपीसी - 4785 - 4874
लोकल एक्ट में जमकर हुई कार्रवाई
नागौर पुलिस ने लोकल एक्ट के मामलों में गत वर्ष की तुलना में इस बार कहीं अधिक कार्रवाई की। एसपी परिस देशमुख के अनुसार आबकारी अधिनियम में गत वर्ष जहां 434 मामले दज किए गए, वहीं इस वर्ष 495 मामले दर्ज किए गए। आबकारी अधिनियम में हुई कार्रवाई में इस वर्ष पुलिस ने अवैध शराब की बरामदगी भी गत वर्ष की तुलना में ज्यादा की है। इसी प्रकार जुआ अधिनियम में वर्ष 2016 में 300 कार्रवाई हुई, वहीं इस बार 303 कार्रवाई की गई। स्वापक औशधी एवं नशीले पदार्थ अधिनियम में गत वर्ष जहां 20 मामले हुए, वहीं इस बार 31 मामले दर्ज किए गए। एक्सप्लोजिव एक्ट में इस वर्ष काफी ज्यादा कार्रवाई की गई। वर्ष 2016 में 27 मामले हुए, जबकि वर्ष 2017 में 35 मामले दर्ज कर कार्रवाई की गई। शस्त्र अधिनियम में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष कार्रवाई के लिहाज से कमजोर रहा। गत वर्ष 40 मामले दर्ज किए गए, वहीं इस वर्ष 31 मामले ही शस्त्र अधिनियम में दर्ज हो पाए। कुल मिलाकर लोकल एक्ट में जहां वर्ष 2016 में 1383 मामले दर्ज किए गए, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 1542 रहा।
निरोधात्मक कार्रवाई में भी इजाफा
पुलिस की निरोधात्मक कार्रवाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष काफी संतोषजनक स्थिति है। 107/151 सीआरपीसी में गत वर्ष 3867 इस्तगासे पेश किए गए, जबकि इस बार यह संख्या 4507 रही। इसी प्रकार 110 सीआरपीसी में गत वर्ष 1310 मामले दर्ज हुए, जबकि इस वर्ष 1715 मामले दर्ज किए गए। 122 सीआरपीसी के 29 की तुलना में इस वर्ष 41, 133 सीआरपीसी में 22 की तुलना में 51 तथा 145 सीआरपीसी में 22 की तुलना में इस वर्ष 21 मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने गुंडा एक्ट में भी इस बार अच्छी कार्रवाई की। गत वर्ष जहां गुंडा एक्ट के 18 मामले थे, वहीं इस वर्ष 34 मामले दर्ज कर कार्रवाई की।
(नोट - सभी आंकड़े जनवरी से नवम्बर तक के हैं।)
अपराधों पर कसी लगाम
लूट के प्रकरणों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उसका कारण यह है कि हमने हर गंभीर प्रकरण को लूट में दर्ज किया है, अब तक ऐसा कोई प्रकरण नहीं है, जिसमें हमने एफआर लगा दी हो। सभी प्रकरणों में हमें सफलता मिली है, कुछ में जांच चल रही है। चोरी और नकबजनी की जहां तक बात है तो इस वर्ष कम आई है। चोरी के मामलों में 11 प्रतिशत कमी आई है, साथ ही रिकवरी भी 25 प्रतिशत की तुलना में इस बार 28 प्रतिशत रही है। नकबजनी में भी गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 35 मामले कम रहे हैं। रिकवरी प्रतिशत में हमने छोटी चोरियों के साथ बड़ी चोरियों को खोलने में भी सफलता प्राप्त की है। यह सब यह दर्शाता है कि सम्पति सम्बन्धी मामलों में हमने अंकुश लगाया है।
- परिस देशमुख, एसपी, नागौर