
नागौर जिले के पूर्वी छोर पर स्थित परबतसर विधानसभा में इस बार कांग्रेस-भाजपा के साथ आरएलपी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को टिकट देकर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। कांग्रेस ने यहां वर्तमान विधायक रामनिवास गावडिय़ा को दुबारा उतारा है, जबकि भाजपा ने पूर्व विधायक मानसिंह किनसरिया को चौथी बार टिकट दिया है। मानसिंह 2008 व 2013 में विधायक रह चुके हैं। वहीं आरएलपी ने 2008 व 2013 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे लच्छाराम बडारड़ा को टिकट दिया है। परबतसर विधानसभा में इस बार कुल पांच उम्मीदवार हैं, जिनमें एक निर्दलीय है तो एक प्रत्याशी बसपा के भी हैं। परबतसर में मतदाता अभी पत्ते नहीं खोल रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के कार्यकर्ता मुखर होकर पैरवी कर रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी पिछले पांच साल में करवाए गए विकास कार्यों के दम पर जनता से वोट मांग रहे हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी का कहना है कि कांग्रेस के राज में पिछले 5 सालों में कोई काम नहीं हुए। यदि उनको मौका मिला तो जनता की मूलभूत सुविधाओं को सबसे पहले सुधारेंगे तथा परबतसर को भष्ट्राचार मुक्त बनाएंगे।
2018 चुनाव में मिले मत
कांग्रेस - रामनिवास गावडिय़ा - 76,373
भाजपा - मानसिंह किनसरिया - 61,888
जीत का अंतर - 14,485
इस बार मतदाता
कुल - 2,49,254
पुरुष - 1,29,676
महिला - 1,19,574
थर्ड जेंडर - 4
प्रत्याशियों के वादे
- कांग्रेस प्रत्याशी जनता से वादा कर रहे हैं कि यदि फिर से आशीर्वाद मिला तो 36 कौम को साथ लेकर चिकित्सा, शिक्षा, सडक़ों सहित सीवरेज लाइन व पानी की उपलब्ध सुलभ करेंगे। साथ ही 5 वर्षों में विकास में कहीं कमी रह गई है, तो उसे पूरा करेंगे।
- भाजपा प्रत्याशी जनता से वादा करते हुए कहते हैं कि उन्हें दुबारा मौका मिला तो सबसे पहले चिकित्सा, शिक्षा, सडक़ें, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिकता से पूरा करेंगे।
विधानसभा क्षेत्र के बड़े मुद्दे
- परबतसर को रेल मार्ग से किशनगढ़ से जोड़ा जाए। पांच साल पहले घोषणी भी हुई, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। वर्तमान में केवल एक ट्रेन मकराना से परबतसर के बीच चलती है।
- कोरोना के दौरान बंद की गई रोडवेज बसों को दुबारा चालू किया जाए। निजी यातायात वाहनों से सफर करना काफी जोखिम भरा रहता है।
- स्थानीय स्तर पर उद्योग धंधे कम होने से युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है।
- शाम चार बजे बाद परबतसर बस स्टैण्ड पर बसें आना बंद हो जाती है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। डीपो कार्यालय में कार्मिक भी नहीं मिलते।
क्या कहते हैं मतदाता
परबतसर से होकर जाने वाली रोडवेज बसों की संख्या कोरोना से पहले 80-90 थी, लेकिन कोरोना के बाद जब वापस यातायात वाहन शुरू हुए तो मात्र 30 फीसदी बसों को ही चालू किया गया। अजमेर जाने-आने वाली 80 फीसदी बसें बंद कर दी। मकराना-बोरावड़ जाने के लिए करीब 10 बसें थी, उनमें दो-तीन रखी हैं। सरकार ने रोडवेज बसों में महिलाओं को किराए में जो छूट दी है, बसें नहीं होने से उसका लाभ नहीं मिल रहा है। अब प्राइवेट बसों की मनमानी चलती है। विकास की बात करें तो काफी काम हुआ है, लेकिन और करने की आवश्यकता है।
- चांदमल चायल, परबतसर
परबतसर शहर में शाम चार बजे बाद रोडवेज बसें बस स्टैण्ड पर न आकर सीधे गांधी चौक से निकल जाती हैं, जिससे मुख्य सडक़ पर बार-बार जाम लगता है, यात्रियों को परेशानी झेलती पड़ती है। बस स्टैण्ड पर जो लोग ठेले लेकर या दुकान खोलकर बैठे हैं, उनका धंधा भी मंदा हो रहा है।
- सुभाष पारीक, पार्षद, परबतसर
पिछले पांच साल में काफी विकास कार्य हुए हैं, अब जो सबसे बड़ी मांग है, वो परबतसर को किशनगढ़ से रेल मार्ग से जोडऩे की है। कुछ वर्ष पहले घोषणा भी हुई थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया।
- लोकेश मालाकार, पार्षद, परबतसर