नागौर। जिले में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर रहे अवैध जल कनेक्शनों के खिलाफ जलदाय विभाग की कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। विभाग द्वारा अप्रैल से जून 2026 के दौरान चलाए गए विशेष अभियान और जांच में नागौर सर्किल क्षेत्र के अंतर्गत कुल 982 अवैध जल कनेक्शन चिन्हित किए गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन सभी अवैध कनेक्शनों को डिस्कनेक्ट कर दिया गया है। विभाग का मानना है कि अवैध कनेक्शनों के कारण पेयजल वितरण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ राजस्व हानि भी हो रही थी। अभियान के बाद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

तीन डिवीजनों में फैला मिला अवैध जल दोहन का नेटवर्क, 4.23 लाख रुपए की पेनल्टी वसूली, एफआईआर सिर्फ एक
नागौर. जिले में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर रहे अवैध जल कनेक्शनों का बड़ा मामला सामने आया है। जलदाय विभाग की ओर से अप्रैल से जून 2026 के दौरान चलाए गए अभियान और जांच में नागौर सर्किल के अंतर्गत कुल 982 अवैध जल कनेक्शन चिन्हित किए गए। विभाग ने सभी कनेक्शनों को डिस्कनेक्ट करने का दावा किया है। कार्रवाई के दौरान 4.23 लाख रुपए की पेनल्टी वसूली गई, लेकिन इतने बड़े स्तर पर अवैध जल दोहन सामने आने के बावजूद केवल एक एफआईआर दर्ज होना कई सवाल खड़े कर रहा है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार अवैध जल कनेक्शनों का जाल जायल, नागौर और मेड़ता तीनों डिवीजनों तक फैला हुआ था।
नागौर डिवीजन में मिले सबसे ज्यादा 548 अवैध कनेक्शन
जलदाय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सबसे गंभीर स्थिति नागौर डिवीजन में सामने आई, जहां 548 अवैध जल कनेक्शन पकड़े गए। विभाग ने सभी कनेक्शनों को विच्छेद कर दिया। इसी डिवीजन में एक एफआईआर दर्ज की गई तथा 4.23 लाख रुपए की पेनल्टी वसूली गई। इतने बड़े पैमाने पर अवैध कनेक्शन मिलने से यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर लंबे समय तक यह खेल विभाग की नजरों से कैसे ओझल रहा।
जायल और मेड़ता में भी सामने आए सैकड़ों मामले
जलदाय विभाग की जारी रिपोर्ट के अनुसार जायल डिवीजन में 211 अवैध जल कनेक्शन चिन्हित किए गए। इनमें से किसी को भी नियमित नहीं किया गया और सभी कनेक्शनों को काट दिया गया। इसी प्रकार मेड़ता डिवीजन में 223 अवैध कनेक्शन पाए गए, जिन्हें विभाग ने विच्छेद कर दिया। तीनों डिवीजनों को मिलाकर कुल 982 अवैध कनेक्शन सामने आना यह संकेत देता है कि अवैध जल दोहन की समस्या सीमित क्षेत्र तक नहीं बल्कि पूरे सर्किल में फैली हुई थी।
एक भी कनेक्शन नियमित नहीं, सभी पर हुई कार्रवाई
विभागीय आंकड़ों के अनुसार चिन्हित 982 अवैध कनेक्शनों में से एक भी कनेक्शन नियमित नहीं किया गया। सभी मामलों में सीधे डिस्कनेक्शन की कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में कार्रवाई के बाद तीनों डिवीजनों में अवैध कनेक्शनों का बैलेंस शून्य दर्शाया गया है। हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि जब इतनी बड़ी संख्या में अवैध कनेक्शन संचालित हो रहे थे तो उनकी समय पर पहचान क्यों नहीं हो सकी।
ढाई माह में 542 अवैध कनेक्शन और 22 बूस्टर जब्त
जलदाय विभाग के अनुसार 1 अप्रैल से 15 जून तक जिले में विशेष अभियान अभियान चला था। इसमें विभाग की ओर से अलग-अलग टीमें बनाकर 542 अवैध जल कनेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें नगर उपखंड नागौर में 447, जिला उपखंड प्रथम नागौर में 25, जिला उपखंड द्वितीय नागौर में 27 तथा मूंडवा में 43 अवैध कनेक्शन पाए गए। इसी अभियान के दौरान 22 अवैध बूस्टर भी जब्त किए गए। इनमें नगर उपखंड नागौर से 13, जिला उपखंड द्वितीय नागौर से 6 तथा मूंडवा क्षेत्र से 3 बूस्टर शामिल हैं। विभाग ने इन मामलों में भी संबंधित कनेक्शनों को हटाने की कार्रवाई की।
कार्रवाई के बाद भी उठ रहे सवाल
विभाग भले ही अवैध कनेक्शनों के खिलाफ बड़े अभियान का दावा कर रहा हो, लेकिन 982 अवैध कनेक्शनों का सामने आना खुद व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आखिर इतने लंबे समय तक अवैध जल कनेक्शन कैसे चलते रहे, उनकी निगरानी कौन कर रहा था और नियमित निरीक्षण व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। यह चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि यदि जिलेभर में निष्पक्ष और व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाए तो अवैध कनेक्शनों की संख्या और अधिक सामने आ सकती है। सूत्रों के अनुसार मूंडवा, डेह रोड, मेड़ता, खींवसर, जायल और डेगाना क्षेत्र में अब भी कई स्थानों पर अवैध कनेक्शन संचालित होने की शिकायतें मिलती रहती हैं।
बोले अधीक्षण अभियंता: कार्रवाई करते हैं……
जलदाय विभाग नागौर के अधीक्षण अभियंता श्रवण सिंह खिडिय़ा ने कहा कि जिले में कहीं भी अवैध जल कनेक्शन की सूचना मिलने पर विभाग कार्रवाई करता है। इसके लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं और शिकायत मिलने पर विशेष कार्रवाई भी की जाती है।