
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में बुधवार को जयगच्छीय जैन साध्वी बिंदुप्रभा ने धर्मावलंबियों को न्याय पूर्वक धन उपार्जन करते हुए अपनी आजीविका चलाने की प्रेरणा दी। उन्होने कहा कि अन्याय के कारणों को जानने से जीवन में सुख शांति प्राप्त हो सकती है। अन्याय के अन्तर्गत तीन बातें होती हैं। इनमें असत्य का आचरण करना, विश्वासघात करना या धोखा देना और तीसरा है मित्र एवं स्वामी का द्रोह करना। ये तीनों अन्याय कहलाते हैं। अन्याय असत्य से ही प्रारम्भ होता है। चार कारणों से जीव असत्य का प्रयोग करते हैं। क्रोध के वश, लोभ के वश, भय के वश और हास्य के वश। क्रोध में व्यक्ति अंधे के समान हो जाता है। हित - अहित, भला व बुरा, न्याय तथा अन्याय का कोई भान नहीं रहता है। क्रोध उतरने के बाद मात्र पश्चाताप रह जाता है। व्यक्ति भय के कारण असत्य बोल देता है। अपनी बुराई को छिपाने के लिए असत्य का प्रयोग करते हैं। क्रोध के आँख पीछे होती है और भय के आगे होती है। लोभ अंधा होता है। साध्वी ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि सत्य में साहस होता है। इसमें स्पष्टता नजर आती है। इसके विपरीत असत्य में कायरता होती है। अन्याय का दूसरा भेद है विश्वासघात। उन्होंने समझाते हुए कहा कि जैसे ध्वति की प्रतिध्वनि होती है। इसी तरह कर्म का कृत्य उसकी प्रकृति के अनुरूप प्राप्त होता है। हर एक व्यक्ति को चिंतन मनन करना चाहिए कि इसलिए साधक को चाहिए कि वह अन्याय अनीति का त्याग कर न्याय मार्ग पर चलें।
दोपहर में हुआ जय जाप
प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर शारदा ललवानी, रेखा मोदी, रेखा लोढ़ा एवं परम ललवानी ने दिए। विजेताओं को जयमल जैन महिला मंडल ने पुरस्कृत किया। दोपहर में महाचमत्कारिक जयमल जाप का अनुष्ठान किया गया। जाप की प्रभावना तारादेवी, शिखरचंद कोठारी की ओर से वितरित की गयीं। आगंतुकों के भोजन का लाभ मालचंद, प्रीतम ललवानी ने लिया। इस मौके पर जगदीश माली, कन्हैयालाल ललवानी, दिलीप पींचा, पार्षद दीपक सैनी, चंपालाल जांगिड़ आदि मौजूद थे। संचालन संजय पींचा ने किया।