नागौर

महिला मिसाल: दूध की धार से खेत की मेड़ तक, लाली देवी ने बोया आत्मनिर्भरता का बीज

त्योदा गांव की लाली देवी पत्नी हनुमानराम चौधरी वुमन इम्पॉवरमेंट की प्रतीक बनकर उभरी है। वे चार दशक से खेती और पशुपालन से जुड़ी हुई महिला है। उन्होंने 35-40 पशुओं के सहारे परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान की है। यह गांव जयपुर-नागौर सीमा पर बसा होने से दूध के विपणन की सुविधा अच्छी मिल जाती है।
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Aug 21, 2026
त्योदा गांव की लाली देवी पत्नी हनुमान राम चौधरी
त्योदा गांव की लाली देवी पत्नी हनुमान राम चौधरी

चौसला (नागौर). मिट्टी में मेहनत का बीज बोया जाए तो वही मिट्टी आत्मनिर्भरता की फसल देती है। जयपुर-नागौर सीमा पर बसे त्योदा गांव की लाली देवी पत्नी हनुमानराम चौधरी ने इसे साबित किया है। करीब चार दशक से खेती और 32 वर्षों से पशुपालन कर रहीं लालीदेवी ने घरेलू जिम्मेदारियों के साथ इन कामों को परिवार की आर्थिक ताकत बना दिया।

पशुपालन को दिया मजबूत व्यवसाय का रूप

करीब तीन दशक पहले शुरू किया पशुपालन धीरे-धीरे आय का प्रमुख साधन बन गया। पिछले 5-7 वर्षों में गाय पालन भी शुरू किया। आज उनके पास करीब 35 से 40 पशु हैं। दूध की बिक्री से होने वाली आमदनी ने पशुपालन को मजबूत व्यवसाय का रूप दिया । डेयरी फार्म की जिम्मेदारी अब उनके बेटे सुरेश चौधरी संभालते हैं। पशुओं का दूध सुरेश की डेयरी पहुंचता है, जहां से बीएमसी के जरिए जयपुर तक भेजा जाता है।

खेत और पशु एक-दूसरे के सहारे

लाली देवी खेती और पशुपालन को एक-दूसरे का पूरक मानती हैं। खेत से पशुओं को चारा मिलता है तो पशुओं का गोबर खेत के काम आता है। दूध से नकद आमदनी होती है और खेती परिवार की जरूरतों का आधार बनती है।

ईसबगोल से बढ़ाया खेती का दायरा

करीब पांच साल पहले ईसबगोल की खेती शुरू की। कृषि विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी लेकर प्रयोग सफल रहा तो इसका दायरा बढ़ाया। अब ईसबगोल के साथ गेहूं, चवला, बाजरा, सरसों, स्यालु, रंजका और पालक की खेती भी करती हैं।

बहुएं भी संभाल रहीं जिम्मेदारी

पिछले 7-8 वर्षों से उनकी बहुएं भी खेती और पशुपालन में सहयोग कर रही हैं। पशुओं की देखभाल, चारा-पानी और खेत के काम में परिवार की महिलाएं साथ जुटती हैं। चार दशक की मेहनत ने लाली देवी को सिर्फ आमदनी नहीं दी, बल्कि अगली पीढ़ी को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।

यह खास बातें

  • चार दशक से खेती और पशुपालन से जुड़ीं है महिला।
  • 35-40 पशुओं के सहारे परिवार को दी आर्थिक मजबूती।
  • जयपुर-नागौर सीमा पर बसे त्योदा गांव की लाली देवी।
  • 5-7 वर्षों में गाय पालन भी शुरू किया।
  • खेत से पशुओं को चारा मिलता है।
  • डेयरी फार्म की जिम्मेदारी बेटे संभालते हैं।
  • दूध से नकद आमदनी होती है।
  • अगली पीढ़ी को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।
Updated on:
21 Aug 2026 01:34 pm
Published on:
21 Aug 2026 01:34 pm