
फाइल फोटो पत्रिका
नागौर. पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की विसंगतियां भेड़-बकरी और ऊंट पालकों पर भारी पड़ रही हैं। योजना के तहत पशुओं की संख्या के साथ बीमा सीमा तय होने से विशेष रूप से भेड़ और ऊंट पालकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि 28 लाख 82 हजार 252 पशुओं के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 20 लाख 17 हजार 827 पशुओं का ही पंजीकरण हुआ है।
सबसे बड़ी समस्या भेड़ और ऊंट पालकों के सामने है। एक पशुपालक अधिकतम 10 भेड़ों का ही बीमा करवा सकता है। जबकि भेड़ पालन करने वाले पशुपालकों के पास आमतौर पर 100 से 300 तक भेड़ों के रेवड़ होते हैं। ऐसे में महज 10 भेड़ों का बीमा करवाने में पशुपालक ज्यादा रुचि नहीं दिखाते। यही वजह है कि 8 लाख 62 हजार 578 भेड़ों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 2 लाख 94 हजार 16 का ही पंजीकरण हुआ है, जो करीब 34.08 फीसदी है।
ऊंटों के मामले में भी स्थिति चिंताजनक है। एक ऊंट की बीमा राशि 40 हजार रुपए तय है और अधिकतम 10 ऊंटों का बीमा होने पर एक पशुपालक को 4 लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलता है, लेकिन ऊंट पालन सीमित पशुपालकों की ओर से किए जाने और 10 पशुओं की सीमा के कारण लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 38 हजार 958 ऊंटों का पंजीकरण हुआ है। 1 लाख 92 हजार 134 के लक्ष्य के मुकाबले यह करीब 20.27 फीसदी है।
भेड़-बकरी का बीमा सिर्फ 4 हजार
योजना में बीमा राशि को लेकर भी बड़ा अंतर है। ऊंट के 10 पशुओं पर अधिकतम 4 लाख रुपए का बीमा हो सकता है, जबकि भेड़ या बकरी के 10 पशुओं पर एक पशुपालक को केवल 40 हजार रुपए का बीमा कवर मिलता है। एक भेड़ या बकरी की कीमत 4 हजार रुपए आंकी गई है। पशुपालकों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव में 4 हजार रुपए में अच्छी भेड़ या बकरी मिलना मुश्किल है। कम बीमा राशि भी पशुपालकों की अरुचि का कारण बन रही है। गौरतलब है कि गाय और भैंस के लिए भी प्रति पशु 40 हजार रुपए की बीमा राशि निर्धारित है और दो पशुओं का बीमा होने पर अधिकतम 80 हजार रुपए का कवर मिलता है। इसलिए लक्ष्य के आसपास बीमा हो रहे हैं।
पंजीकरण के बाद भी बीमा में अड़चन
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पंजीकरण के बाद भी सभी पशुओं का बीमा नहीं हो पा रहा है। पशु चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बावजूद कई मामलों में बीमा कंपनी की ओर से बीमा नहीं किया जा रहा। ऐसे में पंजीकरण और वास्तविक बीमा की संख्या में भी अंतर सामने आ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024-25 व 2025-26 में 40,47,782 पशुओं का पंजीकरण पशुपालन विभाग की ओर से किया गया, लेकिन बीमा कम्पनी ने मात्र 24,67,911 पशुओं की बीमा पॉलीसी जारी की। यही नहीं बीमित पशु की मृत्यु होने पर अब तक दोनों वर्षों में 67,901 दावे पेश किए गए, जिनमें से 31,051 को ही बीमा क्लेम राशि दी गई है। कई पशुपालकों का आरोप है कि बीमित पशु की मौत होने के बाद भी उन्हें क्लेम का भुगतान नहीं मिल रहा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि योजना को प्रभावी बनाने के लिए भेड़-बकरी और ऊंट पालकों के लिए 10 पशुओं की सीमा पर पुनर्विचार करने के साथ बीमा राशि को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप किया जाना चाहिए। इससे पशुपालकों में योजना के प्रति भरोसा बढ़ेगा और वास्तविक उद्देश्य भी पूरा हो सकेगा।
योजना एक नजर
लक्ष्य - वर्ष 2024-25 का शेष 7,82,252 व वर्ष 2025-26 का 21 लाख मिलाकर कुल लक्ष्य - 28,82,252
कुल लक्ष्य के विरुद्ध अब तक कुल पंजीकरण - 20, 17, 827
पशु वार लक्ष्य एवं अब तक पंजीकरण
गाय का लक्ष्य - 5,83,392, पंजीकरण - 5,60,661
भैंस का लक्ष्य - 5,77,490, पंजीकरण - 5,66,753
ऊंट का लक्ष्य - 1,92,134, पंजीकरण - 38,958
बकरी का लक्ष्य - 6,66,658, पंजीकरण - 5,57,439
भेड़ का लक्ष्य - 8,62,578, पंजीकरण - 2,94,016
Updated on:
20 Aug 2026 11:14 am
Published on:
20 Aug 2026 11:14 am
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