
Chhattisgarh Naxal News: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान जंगल से बरामद 14 लाख 89 हजार रुपए की नकदी को लेकर राज्य सरकार ने पहली बार सार्वजनिक दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू की है। गृह विभाग ने नोटिस जारी कर कहा है कि यदि किसी व्यक्ति का इस जब्त राशि पर वैध स्वामित्व का दावा है तो वह 9 जुलाई 2026 को अपराह्न 3 बजे तक अपना दावा या आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है। तय समय के बाद प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, पहली बार सरकार नक्सलियों द्वारा कथित तौर पर की गई अवैध वसूली से बरामद रकम को उसके वास्तविक हकदार तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया अपना रही है। इससे जब्त संपत्ति के निपटारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, 11 मई 2026 को मिली खुफिया सूचना के आधार पर जिले में नक्सल विरोधी अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान बम निरोधक दस्ते (BDS) की मदद से जंगल के एक चिन्हित स्थान की खुदाई की गई। खुदाई के दौरान जमीन के भीतर दबा एक स्टील का डिब्बा बरामद हुआ। डिब्बे से 500-500 रुपए के नोटों के 29 बंडल, एक अतिरिक्त बंडल और नक्सली साहित्य मिला। नकदी की कुल राशि 14 लाख 89 हजार रुपए निकली, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।
पुलिस का दावा है कि बरामद नकदी नक्सलियों द्वारा अवैध वसूली (लेवी) के जरिए एकत्र की गई थी। मामले में थाना सोनपुर में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA) की धारा 17 और 40 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।पुलिस अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई कर रही है।
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब्त नकदी पर यदि किसी व्यक्ति का वैध स्वामित्व है या उसे इस संबंध में कोई आपत्ति दर्ज करानी है, तो वह 9 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजे तक अपना पक्ष प्रमुख सचिव, गृह विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नया रायपुर अटल नगर के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त किसी भी दावा या आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सल विरोधी अभियानों में बरामद नकदी या संपत्ति के मामलों में पहली बार सार्वजनिक रूप से दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है। इस कदम का उद्देश्य जब्त संपत्ति के संबंध में पारदर्शिता बढ़ाना और विधिक प्रावधानों के अनुरूप वास्तविक हकदारों को अवसर देना है।
यदि कोई वैध दावेदार सामने नहीं आता है, तो आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। यह पहल नक्सल विरोधी अभियानों में जब्त संपत्ति के निष्पक्ष और पारदर्शी निपटारे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।