
RMC प्लांट की आड़ में अवैध उत्खनन (photo source- Patrika)
Chhattisgarh illegal mining: नारायणपुर-अंतागढ़ मुख्य मार्ग से लगे ताड़ोकी क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे एक रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सडक़ निर्माण कार्य के बहाने स्थापित यह भारी-भरकम प्लांट पिछले छह महीनों से भी अधिक समय से बिना किसी वैध अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों के धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय से जारी इस अवैध संचालन की भनक शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों तक को नहीं है, जिससे प्रशासनिक मुस्तैदी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जब से इस आरएमसी प्लांट की स्थापना हुई है, तब से समूचे क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की बाढ़ आ गई है। प्लांट की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध रेत परिवहन, मुरूम का अवैध उत्खनन, मिट्टी का अवैध खनन और सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाले बहुमूल्य जल स्रोतों का अवैध दोहन धड़ल्ले से किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन अवैध गतिविधियों के माध्यम से फर्जी कागजात और भारी-भरकम बिल तैयार कर बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित किए जा रहे हैं। रिहायशी इलाके और उपजाऊ कृषि भूमि के अत्यंत समीप स्थित होने के कारण इस प्लांट से निकलने वाले धूल के गुबार और हानिकारक प्रदूषक तत्व सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेतों में धूल की मोटी परत जमने के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। साथ ही, स्थानीय आबादी में सांस और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है।
ताड़ोकी ग्राम पंचायत की सरपंच रामबती गावड़े ने स्पष्ट किया कि आरएमसी प्लांट की स्थापना के लिए पंचायत से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) या सहमति नहीं ली गई है। ग्रामसभा में भी इस विषय पर कभी कोई चर्चा नहीं की गई। वहीं, इस मामले पर जब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राहुल रजक से बात की गई, तो उन्होंने हैरान करने वाला बयान देते हुए कहा कि यह पूरा मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो नियमों के तहत निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मामले में जब विभिन्न पक्षों से बात की गई, तो सबने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। संबंधित जमीन के मालिक का कहना है कि उन्होंने केवल प्लांट लगाने के उद्देश्य से अपनी भूमि किराये पर दी थी। संचालकों ने प्रशासनिक स्वीकृतियां ली हैं या नहीं, इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं बल्कि प्लांट प्रबंधन की है। दूसरी ओर, आरएमसी प्लांट प्रबंधन ने सारा ठीकरा जमीन मालिक पर फोड़ते हुए दावा किया कि भूमि संबंधी सभी विधिक स्वीकृतियां प्राप्त करना जमीन मालिक का दायित्व था। हालांकि, प्लांट संचालन के लिए आवश्यक पर्यावरण विभाग की एनओसी और प्रशासनिक अनुमतियों पर प्रबंधन कोई भी स्पष्ट दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ अब क्षेत्रवासियों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सडक़ निर्माण कार्य से जुड़े सभी संसाधनों, वाहनों और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की गहनता से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि इस बड़े खेल के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
Published on:
08 Jun 2026 01:12 pm
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