
वर्तमान में केवल 10 छात्र ही आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। (Photo Patrika)
Chhattisgarh News: कभी अबूझमाड़ में सरकारी व्यवस्थाओं की कमी का कारण नक्सलवाद को बताया जाता था। लेकिन अब जब क्षेत्र का बड़ा हिस्सा सामान्य स्थिति की ओर लौट चुका है, तब भी आदिवासी बच्चों के लिए संचालित गारपा बालक आश्रम शाला की बदहाल व्यवस्था कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पत्रिका की जमीनी पड़ताल में सामने आया कि 46 आदिवासी बच्चों के लिए संचालित इस आश्रम में पिछले एक माह से अधीक्षक नहीं है। बच्चों को प्रतिदिन केवल दाल-चावल परोसा जा रहा है और वे शौचालय, मच्छरदानी, साबुन तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं।
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