
नवापारा में चल रहा अवैध काम (photo source- Patrika)
विनोद जैन/Chhattisgarh illegal mining: गोबरा-नवापारा के समीप ग्राम कोलियारी स्थित शीतला तालाब में कथित अवैध मिट्टी उत्खनन का मामला अब प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नायब तहसीलदार द्वारा जारी स्थगन आदेश के बावजूद तालाब क्षेत्र में चैन माउंटेन मशीनों से खुदाई और हाइवा वाहनों से मिट्टी परिवहन जारी रहने के आरोप लगे हैं। सबसे हैरानी की बात यह रही कि मौके पर पहुंची खनिज विभाग की टीम ने गतिविधियों को देखने के बावजूद कोई जब्ती या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। इससे ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार 18 मई 2026 को गोबरा-नवापारा के नायब तहसीलदार द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि शीतला तालाब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का मिट्टी उत्खनन, परिवहन और खनन कार्य तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद आरोप है कि तालाब क्षेत्र में लगातार मशीनों से खुदाई और मिट्टी परिवहन का काम जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि स्थगन आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गया, जबकि जमीनी स्तर पर उसका कोई असर दिखाई नहीं दिया।
सूत्रों के मुताबिक रायपुर खनिज विभाग के निरीक्षक प्रवीण नेताम अपनी टीम के साथ स्थल निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान मौके पर चैन माउंटेन मशीन और कई हाइवा वाहन सक्रिय पाए गए। इसके बावजूद विभागीय टीम ने न तो किसी वाहन को जब्त किया और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई की। आरोप है कि टीम केवल मौखिक समझाइश देकर वापस लौट गई। यही बात अब पूरे मामले को और ज्यादा विवादित बना रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मौके पर अवैध गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
खनिज निरीक्षक द्वारा कथित तौर पर दिया गया यह बयान कि “ग्रामीणों की सहमति से कार्य हो रहा था”, अब नए विवाद का कारण बन गया है। जानकारों का कहना है कि खनिज उत्खनन और परिवहन जैसे कार्य केवल वैध अनुमति, रॉयल्टी और विभागीय स्वीकृतियों के आधार पर ही किए जा सकते हैं। ग्रामीणों की मौखिक सहमति किसी भी प्रकार से कानूनी अनुमति का विकल्प नहीं हो सकती। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब स्थगन आदेश पहले से लागू था, तब विभाग ने मौके पर सख्ती क्यों नहीं दिखाई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम मामलों में बिना रॉयल्टी या वैध दस्तावेजों के परिवहन करने वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई कर दी जाती है। लेकिन यहां मशीनें और हाइवा खुलेआम काम करते रहे और विभाग की टीम देखने के बाद भी शांत रही। इससे लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या इस पूरे मामले को किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की पारदर्शी जांच करनी चाहिए। लोगों की मांग है कि यह सार्वजनिक किया जाए कि उत्खनन किन दस्तावेजों और किस अनुमति के आधार पर किया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि स्थगन आदेश लागू होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के पीछे कौन जिम्मेदार है।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्थगन आदेश लागू होने के बावजूद मशीनें चलती रहें और जिम्मेदार विभाग केवल समझाइश देकर लौट जाए, तब सवाल केवल अवैध उत्खनन का नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का बन जाता है।अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
Updated on:
4 Jun 2026, 7:20 PM IST
Published on:
4 Jun 2026, 7:19 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.