
नर्मदापुरम/ नर्मदा के सेठानी घाट पर प्रति पूर्णिमा को महाआरती का आयोजन किया जाता है, शुक्रवार रात 8 बजे महाआरती की गई। जिसमें सैकड़ों की संख्या में शहरवासी शामिल हुए ने मां नर्मदा के जयकारे लगाए। रात 7.30 बजे नर्मदा अष्टक के साथ महाआरती शुरू की गई।
2011 में शुरू की गई थी महाआरती
सेठानीघाट पर पूर्णिमा और अन्य त्योहारों के अवसर पर मां नर्मदा की महाआरती बनारस की गंगा आरती के तर्ज पर होती है। महाआरती संयोजक प्रशंात दुबे ने बताया कि प्रतिपूर्णिमा पर महाआरती 2011 गंगा दशहरा से प्रारंभ की गई थी। तब से अब तक महाआरती का आयोजन लगातार जारी है। पूर्णिमा के अलावा राष्ट्रीय पर्वों पर भी इसका आयोजन किया जाता है। यह महाआरती बनारस से आए पात्रों से की जाती है। एक दिन पहले से ही इसकी तैयारियां शुरु हो गई हैं।
कोरोना में भी नहीं रुकी
मां नर्मदा शहरवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं, यही कारण है कि कोरोना काल में जब पूरी दुनिया थमी रही इस दौरान पर महाआरती करने की परंपरा लगातार जारी रही।
महाआरती का महत्व
पं. घनश्याम तिवारी ने बताया कि महाआरती के समय यदि भक्त धूप आरती के दर्शन करें तो उसके पित्र दोष समाप्त हो जाते हैं। वहीं कपूर से आरती करने पर मां नर्मदा को शीतलता मिलती है।