
British-era water harvesting system is still operational in Pachmarhi
Pachmari-एमपी में भीषण गर्मी से हर कोई हलाकान है। जलस्रोत दम तोड़ चुके हैं, पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। ऐसे में अंग्रेजों की तकनीक का कमाल सामने आया है जिससे उन्होंने ऐसा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जोकि नई सदी में भी लोगों की प्यास बुझा रहा है। प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में भीषण गर्मी के दौर में जहां आधुनिक तकनीकों के बावजूद जल संरक्षण और जलापूर्ति बड़ी चुनौती बनी है, वहीं हिल स्टेशन पचमढ़ी में 161 साल पहले अंग्रेजों का बनाया वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम आज भी काम कर रहा है। इसी तकनीक से सतपुड़ा पर्वतमाला की करीब 1350 मीटर ऊंची धूपगढ़ चोटी पर सैलानियों को पर्याप्त पानी मिल रहा है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व इस प्रणाली के जरिए हर साल 63 हजार लीटर वर्षा का पानी जमा कर रहा है। यह पानी 6 माह तक सैलानियों-कर्मियों की जरूरतें पूरी करता है।
अंग्रेज धूपगढ़ में प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते थे, लेकिन ऊंचाई पर पानी की जबर्दस्त समस्या थी। यह परेशानी दूर करने के लिए अंग्रेज इंजीनियरों ने उपाय तलाशा। काफी मंथन करने के बाद उन्होंने यहां वर्षा जल सहेजने का विचार किया।
इंजीनियरों ने काम शुरु करवाया और सन 1865 में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया। अंग्रेजों ने धूपगढ़ में 4 बड़े टैंक और एक भवन बनवाया। भवन की छत पर वर्षा जल सहेजने की व्यवस्था की। छत से पानी को भूमिगत नालियों से टैंकों तक फिर छोटे-छोटे पाइपों से पानी को चोटी की विभिन्न व्यू प्वाइंट तक पहुंचाया।
एसटीआर पचमढ़ी के सहायक संचालक संजीव शर्मा ने बताया कि वर्ष 1865 में बनाए गए इस वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की तकनीक कमाल की है। इससे हर साल लगभग 63 हजार लीटर वर्षा जल संग्रहित किया जाता है। 1350 मीटर ऊंची पर्वत चोटी पर यह पानी लोगों की प्यास बुझाने के काम आता है।
नियमित रखरखाव और मरम्मत के कारण यह प्राचीन तकनीक आज भी प्रभावी रूप से काम कर रही है और सैलानियों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। यह भवन अब भी प्राचीन इंजीनियरिंग और जल संरक्षण तकनीक का उदाहरण है।
1350 मीटर ऊंची पर्वत चोटी
प्यास बुझा रही पुरानी तकनीक
161 साल से चल रहा सिस्टम
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से संजो रहे बारिश की बूंदें
सदी पार कर गई सोच
Updated on:
03 Jun 2026 06:32 am
Published on:
03 Jun 2026 06:32 am
