नरसिंहपुर.शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच नगर पालिका का ट्रेंचिंग ग्राउंड बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। कचरा निस्तारण के लिए बनाए गए इस स्थल की स्थिति ऐसी हो गई है कि यह अब मवेशियों के लिए मौत का अड्डा बनता जा रहा है। यहां खुले में पड़े मृत पशुओं […]
नरसिंहपुर.शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच नगर पालिका का ट्रेंचिंग ग्राउंड बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। कचरा निस्तारण के लिए बनाए गए इस स्थल की स्थिति ऐसी हो गई है कि यह अब मवेशियों के लिए मौत का अड्डा बनता जा रहा है। यहां खुले में पड़े मृत पशुओं के शव न केवल प्रशासनिक लापरवाही उजागर कर रहे हैं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट को भी जन्म दे रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक नगर पालिका के पास मृत मवेशियों के निस्तारण के लिए हर साल करीब 5 लाख रुपए का प्रावधान है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती। शव कई दिनों तक खुले में पड़े रहते हैं, जिससे आसपास दुर्गंध का वातावरण बना रहता है।
ट्रेंचिंग ग्राउंड और डंपिंग यार्ड के आसपास का क्षेत्र तेजी से प्रदूषित हो रहा है। सड़ते शवों से उठती बदबू और कचरे में लगने वाली आग से निकलने वाला धुआं वातावरण को जहरीला बना रहा है। इससे वहां कार्यरत कर्मचारियों के साथ.साथ आसपास के रहवासियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
खुले में घूमने वाले मवेशी भोजन की तलाश में ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंच जाते हैं। कचरे में मौजूद प्लास्टिकए पॉलीथिन और जहरीले अपशिष्ट को वे चारा समझकर खा लेते हैंए जिससे उनकी मौत हो रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई मवेशी तड़प.तड़प कर दम तोड़ देते हैंए लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है। न तो शवों को समय पर हटाया जा रहा है और न ही ट्रेंचिंग ग्राउंड को सुरक्षित बनाया गया है। जबकि नियमों के अनुसार मृत पशुओं का तत्काल निस्तारण जरूरी होता है, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
शहरवासियों में इस समस्या को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों ने मांग की है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड में वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन किया जाए, मृत पशुओं के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए और आवारा मवेशियों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।