नरसिंहपुर

जिले के 8 स्कूलों में नहीं बिजली, 18 में बालकों के शौचालय नहीं, कागजों में व्यवस्थाएं पूरी, मैदानी स्थिति बनी बेकार

government schools नरसिंहपुर. नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है लेकिन जिले में शासकीय स्कूलों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में करीब 8 स्कूल आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं, वहीं 18 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं है। स्कूलों में जरूरी सुविधाओं […]

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जिले के दूरस्थ गांवों के स्कूल जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है।

government schools नरसिंहपुर. नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है लेकिन जिले में शासकीय स्कूलों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में करीब 8 स्कूल आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं, वहीं 18 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं है। स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की कमी बच्चों के साथ शिक्षकों के लिए परेशानियां बढ़ाने वाली है लेकिन इनकी पूर्ति के लिए सरकारी प्रयास नाकाफी हैं।
जिले की माध्यमिक शाला ढाना, माध्यमिक शाला मलकुही, प्राथमिक शाला झिलपानी (ई), माध्यमिक शाला रानीपिंडरई, माध्यमिक शाला करहैया देवनगर, प्राथमिक शाला रानीकामथ, प्राथमिक शाला महुआकछार और माध्यमिक शाला बगदरा में बिजली नहीं है। महुआकछार स्कूल वर्ष 2008 में बना था लेकिन आज तक यहां बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इन स्कूलों में गर्मी के बीच पंखे और प्रकाश व्यवस्था के अभाव में विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वहीं डिजिटल शिक्षा पूरी तरह प्रभावित है।
इन स्कूलों में नहीं हैं बालकों के लिए शौचालय
इसी तरह जिले के 18 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय नहीं हैं। इनमें प्राथमिक शाला झिरी कला, कुकवारा, सहाजपुरा, महुआकछार, जमुनिया खुर्द, मगरहाऊ, मोहद ग्वारी, खकारिया, नब्बा टोला (ई), सुपारी, पोंडी, पिठहरा, कजरोटा, स्टेशन टोला इमलिया (ई), खैरी (कामती), खैरी कला सहित माध्यमिक शाला करहैया देवनगर और खाकरेड़ी शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से माध्यमिक शाला करहैया देवनगर और प्राथमिक शाला महुआकछार ऐसे स्कूल हैं जहां बिजली और शौचालय—दोनों ही सुविधाओं का अभाव है।
व्यवस्था पर गंभीर सवाल
ग्रामीण अंचलों में स्थित इन स्कूलों में विद्यार्थियों को एक ओर भीषण गर्मी में बिना बिजली के पढ़ाई करनी पड़ रही है, तो दूसरी ओर शौचालय नहीं होने से खुले में जाने की मजबूरी बनी हुई है। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
वर्जन
जिन भी स्कूलों में बिजली, बालक शौचालय नहीं हैं उनके संबंध में कार्य कराने शासन को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। बिजली विहीन स्कूल दूरस्थ पहाड़ी गांव के हैं। इसलिए समस्या आ रही है।
मनीष चौकसे, डीपीसी नरसिंहपुर

Published on:
03 Apr 2026 12:44 pm
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