
The sowing of Kharif crops नरसिंहपुर. जिले में मानसून की शुरुआती सुस्ती से खरीफ सीजन की बोवनी में हुई देरी अब जाकर रफ्तार पकड़ती दिख रही है। मौसम से मिली राहत के बाद किसान दोबारा खेतों में उतर आए हैं। हालांकि कई क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश से खेतों में जलभराव व अधिक नमी होने से बोवनी का कार्य अभी भी पूरी गति नहीं पकड़ सका है। मौसम अनुकूल रहने पर आने वाले दिनों में बोवनी का रकबा बढऩे की संभावना है। जिले में अब तक 91350 हेक्टेयर से अधिक रकबे में बोवनी हो चुकी है।
जिले में कृषि विभाग ने जिले में खरीफ की 12 प्रमुख फसलों की बोवनी के लिए 2 लाख 69 हजार 663 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके मुकाबले अब तक प्रमुख जिन फसलों की बोवनी लगातार बढ़ रही है। उनमें सबसे अधिक रकबे में मक्का और धान की बुवाई की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक मक्का 50 हजार हेक्टेयर तथा धान 22 हजार हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है। इसके अलावा सोयाबीन 9 हजार हेक्टेयर, राहर 8 हजार हेक्टेयर, उड़द 2 हजार हेक्टेयर, ज्वार 200 हेक्टेयर तथा तिल 150 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में खेतों से अतिरिक्त पानी निकल चुका है, वहां किसान तेजी से बोवनी कर रहे हैं, जबकि निचले इलाकों में अभी भी अधिक नमी के कारण मशीनों और कृषि कार्यों में परेशानी बनी हुई है। यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम अनुकूल रहा तो जिले में खरीफ बोवनी का कार्य और गति पकड़ लेगा।
फसलों का चयन समझदारी से करना जरूरी
मानसून की शुरुआत अपेक्षा से देर से होने के कारण खरीफ सीजन की बोवनी भी विलंब से शुरू हुई। इसके बाद लगातार हुई बारिश से कई स्थानों पर खेतों में पानी भर गया, जिससे बोवनी का कार्य प्रभावित हुआ। अब मौसम खुलने के साथ किसान तेजी से खेतों में उतर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष शर्मा कहते हैं कि किसानों को बोवनी के लिए फसलों के चयन में समझदारी और सावधानी रखना जरूरी है। जिससे मौसम के कारण फसलों पर असर न हो। साथ ही किसान मेढ़ नाली पद्धति से खेती करें, खेतों में जलभराव की समस्या न हो इस पर विशेष ध्यान दें। जैविक खेती को बढ़ावा दें।
फैक्ट फाइल
खरीफ की प्रमुख फसलें- 12
कुल लक्ष्य-2,69,663 हेक्टेयर
अब तक धान की बोवनी- 22,000 हेक्टेयर
मक्का- 50,000 हेक्टेयर
सोयाबीन-9,000 हेक्टेयर
तुअर- 8,000 हेक्टेयर
उड़द- 2,000 हेक्टेयर
ज्वार-200 हेक्टेयर
तिल- 150 हेक्टेयर