नरसिंहपुर

संभावनाओं से भरा नरसिंहपुर जिला पर्यटन के नक्शे से दूर, योजनाओं के अभाव में उपेक्षित ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल

historical heritage, and natural beauty नरसिंहपुर. समूचा जिला धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध है, लेकिन अब भी पर्यटन के मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाने से दूर है। जिले में अनेक ऐसे स्थल मौजूद हैं, जिन्हें सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाए तो वे प्रदेश ही नहीं, देश स्तर पर भी […]

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पिठहरा का राजमहल

historical heritage, and natural beauty नरसिंहपुर. समूचा जिला धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध है, लेकिन अब भी पर्यटन के मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाने से दूर है। जिले में अनेक ऐसे स्थल मौजूद हैं, जिन्हें सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाए तो वे प्रदेश ही नहीं, देश स्तर पर भी आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इसके बावजूद पर्यटन विकास को लेकर अब तक कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना आकार नहीं ले सकी है। जिससे दशकों से जिले के कई स्थल उपेक्षित बने हुए हैं।

बरमान-सतधारा क्षेत्र


लंबे समय से जिला पुरातत्व समिति की बैठक भी नहीं हो सकी है। ऐसे में संरक्षण, सौंदर्यीकरण, बुनियादी सुविधाओं आदि से जुड़े विषय लंबित पड़े हुए हैं। प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर सडक़, संकेतक बोर्ड, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, पार्किंग आदि की सुविधाएं नहीं है। जिससे जिले के लोग ही चाहकर इन स्थलों तक आने-जाने में असहज महसूस करते हैं। वहीं जिले के प्रमुख स्थलों के महत्व से बाहर के लोग भी वंचित हैं क्योंकि इन स्थलों को इस तरह से अब तक नहीं उभारा जा सका है कि इनके धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व से अन्य क्षेत्रों के लोग अवगत हो सकें। जिले के बरमान जैसे प्राचीन और प्रसिद्ध नर्मदा तट, विभिन्न मंदिरों और प्राकृतिक स्थलों पर श्रद्धालुओं व पर्यटकों की आवाजाही तो होती है, लेकिन पर्यटन के मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित नहीं हो सकी हैं। स्थानीय स्तर पर भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। शेढ़ नदी के टोनघाट पर जरूर कुछ सुविधाओं को जुटाया गया लेकिन इसके बाद यहां ऐसे कोई कार्य नहीं हो सके जिससे यह स्थल टूरिज्म के मानकों से विकसित हो सके। वहीं जिला मुख्यालय पर पीस मेमोरियल को एक संग्रहालय के रूप में बनाने का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में है।

पांडव मठ बरहटा


बेहतर रोडमैप बनना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का समग्र विकास कर उन्हें पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए, एक रोडमैप तैयार किया जाए तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। पर्यटन के माध्यम से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खानपान और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को लाभ मिल सकेगा। जरूरत है कि इन स्थलों के संरक्षण, बुनियादी सुविधाओं और प्रचार-प्रसार के लिए समन्वित योजना बनाई जाए, ताकि नरसिंहपुर भी प्रदेश के प्रमुख पर्यटन जिलों की कतार में शामिल हो सके।

प्राचीन चौगान किला


पर्यटन से ऐसे बदल सकती है जिले की तस्वीर

शेढ़ नदी का टोनघाट


होटल, लॉज और होमस्टे व्यवसाय में वृद्धि
परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ेगी
स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को बाजार मिलेगा
युवाओं को गाइड और सेवा क्षेत्र में रोजगार
छोटे व्यापार और खानपान गतिविधियों में बढ़ोत्तरी
ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर
फैक्ट फाइल
यह हैं प्रमुख स्थल
प्राचीन चौगान किला
छोटा जबलपुर क्षेत्र
शेढ़ नदी का टोनघाट
पांडव मठ बरहटा
सांकल गुरुगुफा क्षेत्र
बरमान-सतधारा क्षेत्र
बिनैकी टोला में बने शैलचित्र
गरूण मंदिर, पिठहरा का राजमहल
मढ़ के महादेव क्षेत्र
वर्जन
काफी समय पूर्व समिति की बैठक हुई थी, यह सही है कि एक बेहतर टूरिज्म सर्किट बन जाए तो जिले के जो प्रमुख स्थल है उन तक लोगों की पहुंच सहज हो जाएगी। वह स्थान भी सुरक्षित रहेंगे। लोगों को रोजगार भी मिलेगा। समिति की बैठक जल्द हो इसके लिए प्रशासन स्तर पर बात रखी जाएगी।
इंजी. सुनील कोठारी, आजीवन सदस्य पुरात्व समिति नरसिंहपुर
जिले में जो भी धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व के स्थल हैं उनको चिन्हित कर सूची बनाई जा चुकी है। जल्दी ही पुरातत्व समिति की बैठक भी करेंगे। अभी हमनें एक प्रतियोगिता भी कराई थी, जिसका यही ध्येय था कि लोग हमारी धरोहर को जानें। जो भी प्रमुख स्थल हैं उनका एक रोडमैप तैयार करने जरूर प्रयास करेंगे। उन स्थलों तक लोगों की आवाजाही को सहज बनाएंगे और उन स्थलों की ब्राडिंग कराने भी योजना बनाकर कार्य किया जाएगा।
गजेंद्र नागेश, सीईओ जिला पंचायत नरसिंहपुर

Published on:
08 Feb 2026 01:18 pm
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