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आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेगा ‘समान वेतन’, EPF और ESI ! लेकिन कब ?

MP News: ज्ञापन में प्रमुख रूप से समान कार्य के लिए समान वेतन और समान अधिकार लागू करने की मांग की गई....

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Outsourced employees

Outsourced employees (Photo Source: AI Image)

MP News:मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अध्यापक, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, मप्र के बैनर तले आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं के समाधान और विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया है कि आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार निवेदन किए जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

की गई तई मांगे

ज्ञापन में प्रमुख रूप से समान कार्य के लिए समान वेतन और समान अधिकार लागू करने, आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण करने, सभी कर्मचारियों को समय पर पूरा वेतन देने, ईपीएफ और ईएसआई की सही एवं नियमित सुविधा सुनिश्चित करने, कार्य के अनुसार ग्रेड वेतन देने तथा नौकरी की सुरक्षा प्रदान करते हुए मनमानी छंटनी रोकने की मांग की गई है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन मांगों के समर्थन में जिले के आउटसोर्स कर्मचारी कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देने के लिए उपस्थित होंगे। यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेश के समस्त आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।मोर्चा पदाधिकारियों ने मांगों पर संवेदनशीलता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।

चतुर्थ श्रेणी पदों पर नहीं होगी नियुक्ति

जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के किसी भी विभाग में अब चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होगी। सरकार ने इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके पहले ही सरकार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया बंद कर चुकी है।

वित्त विभाग द्वारा 31 मार्च 2023 को विभागों में चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी रखने को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसमें रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर पद पूर्ति जरूरी होने पर आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं लेने की छूट थी, लेकिन बजट के अभाव में नियुक्तियां नहीं की जा सकती थीं।