
Abhishek Banerjee On ECI: पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद और तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब 30 लाख नाम हटाए गए, जिसका फायदा बीजेपी को पहुंचाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने अपने दावे के समर्थन में चुनाव पर्यवेक्षकों के एक कथित WhatsApp ग्रुप चैट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। उनका कहना है कि यह स्क्रीनशॉट अप्रैल का है और इसमें एक जनरल ऑब्जर्वर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे।
शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में एक व्यक्ति खुद को 'Gen Observer 190, Chunchura' बताते हुए लिखता दिखाई दे रहा है कि जनरल ऑब्जर्वरों को पहले केवल निगरानी करने और कुछ नहीं करने के लिए कहा गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल में अब उनसे सब कुछ करने को कहा जा रहा है। मैसेज में चुनाव आयोग से इस बदलाव को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बाद उसी व्यक्ति की ओर से लिखा गया है कि उसे लगता है कि यह चुनाव आयोग की ओर से 'चीटिंग' है। एक और मैसेज में कहा गया है कि दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर से पर्यवेक्षकों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के साथ बातचीत नहीं करने के लिए कहा गया था, लेकिन अब CEO पर्यवेक्षकों के साथ बैठक कर रहे हैं।
दूसरे स्क्रीनशॉट में बैठक को लेकर एक और मैसेज दिखाई देता है। इसमें दावा किया गया है कि बैठक में राज्य सरकार के अधिकारी की ओर से कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद मैसेज भेजने वाले ने CEO को तत्काल हटाने की मांग की है। उन्होंने लिखा कि वह खुद कुछ समय तक हिमाचल प्रदेश के CEO रह चुके हैं और उनकी मांग एक निष्पक्ष CEO की नियुक्ति की है।
अभिषेक बनर्जी ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि यह मामला केवल एक चैट का नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल के इस WhatsApp बातचीत में सामने आई बातें करीब 30 लाख नामों को मतदाता सूची से हटाने की कथित साजिश की ओर इशारा करती हैं। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और न ही इसे दबाया जा सकता है। बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत के मुख्य न्यायाधीश से इस पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की।
यह पहली बार नहीं है जब अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग की WhatsApp के जरिए अधिकारियों को दिए जा रहे निर्देशों पर सवाल उठाया है। फरवरी 2026 में भी उन्होंने कथित WhatsApp चैट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए आरोप लगाया था कि SIR से जुड़े निर्देश आधिकारिक माध्यमों के बजाय WhatsApp के जरिए दिए जा रहे हैं। उस समय उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया संबंधी निर्देशों के संदर्भ में सवालों से जोड़ा था।