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इंदौर के बाद अब गुजरात में दूषित पानी का कहर: 130 लोग बीमार, प्रशासन में मचा हड़कंप

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों से 600 से अधिक पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें 130 टाइफाइड पॉजिटिव पाए गए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें 109 मरीज 1 से 16 साल तक के बच्चे हैं।
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Gujarat Water Tragedy
प्रदूषित पानी ने मचाया तांडव

Gujarat Water Tragedy: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर में टाइफाइड का प्रकोप फैल गया है। पाइपलाइन लीकेज से दूषित पानी की सप्लाई के कारण सेक्टर 24, 26, 28 और आदिवाड़ा इलाकों में 130 से अधिक लोग टाइफाइड से संक्रमित हो चुके हैं। सभी मरीजों को गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मरीजों में बुखार, पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों से 600 से अधिक पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें 130 टाइफाइड पॉजिटिव पाए गए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें 109 मरीज 1 से 16 साल तक के बच्चे हैं। मरीजों में बुखार, पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण प्रमुख हैं। दिसंबर तक कोई मामला नहीं था, लेकिन नए साल की शुरुआत में अचानक मामले बढ़े।

पाइपलाइन में 10 जगह लीकेज

जांच में पता चला कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बिछाई गई नई पाइपलाइनों में कम से कम 10 जगहों पर रिसाव है, जिससे सीवेज का गंदा पानी पीने की लाइन में मिल गया। पानी के सैंपल रिपोर्ट्स में पीने का पानी असुरक्षित पाया गया। गांधीनगर नगर निगम ने मरम्मत कार्य तेज कर दिया है।

40 टीमें गठित, घर-घर सर्वे

स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है। 40 टीमें गठित कर घर-घर सर्वे किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर कलेक्टर से फोन पर स्थिति की समीक्षा की। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सिविल अस्पताल का दौरा कर मरीजों का हाल जाना। नागरिकों को उबला हुआ पानी पीने, घर का बना खाना खाने और क्लोरीन टैबलेट्स से टैंक साफ करने की सलाह दी गई है।

अस्पताल अधीक्षक का बयान

सिविल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. मिताबेन पारिख ने कहा, सेक्टर 24, 26, 28 और आदिवाड़ा से सबसे ज्यादा मरीज आए हैं। सभी की हालत स्थिर है, लेकिन बच्चों की संख्या ज्यादा होने से सतर्कता बरती जा रही है।

इंदौर में दूषित पानी से दर्जनों मौतों के बाद गुजरात में यह प्रकोप शहरी पानी सप्लाई की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाइपलाइन रखरखाव और नियमित जांच की कमी से ऐसे हादसे हो रहे हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द हालात नियंत्रित हो जाएंगे।

Updated on:
03 Jan 2026 09:12 pm
Published on:
03 Jan 2026 09:12 pm