
Banking Fraud in India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को पहले से ज्यादा आसान, तेज और स्मार्ट बना रही है, वहीं इसके साथ साइबर ठगी (Cyber Fraud) और वित्तीय धोखाधड़ी (Financial fraud) का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। एक नई सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के बैंक AI आधारित फ्रॉड और स्कैम के बढ़ते मामलों से गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
बायोकैच (BioCatch) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में 84 प्रतिशत भारतीय बैंकिंग अधिकारियों ने धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान में बढ़ोतरी दर्ज की है। रिपोर्ट बताती है कि AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर अपराधियों को भी पहले से ज्यादा ताकतवर बना दिया है।
25 देशों के 1,440 फ्रॉड मैनेजमेंट, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML), रिस्क और कंप्लायंस विशेषज्ञों पर किए गए इस सर्वे में भारत सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल रहा। भारत में सर्वे किए गए 100 बैंकिंग और वित्तीय अपराध रोकथाम अधिकारियों में से 90 प्रतिशत ने कहा कि उनके संस्थानों में पिछले एक साल के दौरान धोखाधड़ी के प्रयास बढ़े हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 81 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। खास बात यह है कि 2025 के सर्वे में भारत में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 90 प्रतिशत पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 84 प्रतिशत लोगों का मानना है कि आने वाले एक साल में AI एजेंट्स वित्तीय क्षेत्र की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो सकते हैं, जिसका साइबर अपराधी फायदा उठा सकते हैं। सर्वे में शामिल 93 प्रतिशत भारतीय अधिकारियों ने कहा कि AI की वजह से फ्रॉड और स्कैम पहले की तुलना में ज्यादा एडवांस और जटिल हो गए हैं। वहीं 90 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में AI की मदद से की गई असली और फर्जी गतिविधियों के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़ी चिंता फ्रॉड की बढ़ती स्पीड को लेकर है। सर्वे में शामिल 95 प्रतिशत अधिकारियों ने कहा कि वे धोखाधड़ी के मामलों के तेजी से बढ़ने को लेकर बेहद चिंतित हैं। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 76 प्रतिशत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित टूल्स के कारण साइबर अपराधी अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से लोगों और संस्थानों को निशाना बना पा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 48 प्रतिशत भारतीय संस्थानों को हर साल 10 मिलियन डॉलर (करीब 1 करोड़ डॉलर) से अधिक का नुकसान धोखाधड़ी के कारण उठाना पड़ रहा है। इनमें से 32 प्रतिशत संस्थानों ने 25 मिलियन डॉलर से अधिक, 16 प्रतिशत ने 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा और 6 प्रतिशत संस्थानों ने 100 मिलियन डॉलर से अधिक के वार्षिक नुकसान की जानकारी दी।
सिर्फ बैंक ही नहीं, ग्राहक भी ऑनलाइन ठगी और स्कैम का शिकार हो रहे हैं। सर्वे के अनुसार, 58 प्रतिशत अधिकारियों का अनुमान है कि उनके ग्राहक हर साल 5 मिलियन डॉलर से अधिक गंवा रहे हैं। वहीं 44 प्रतिशत ने ग्राहकों के नुकसान को 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा बताया।
रिपोर्ट में इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को बढ़ते फ्रॉड का बड़ा कारण बताया गया है। करीब 66 प्रतिशत भारतीय बैंकिंग अधिकारियों ने कहा कि इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम के जरिए होने वाले स्कैम प्रयास धोखाधड़ी बढ़ने की मुख्य वजह हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 59 प्रतिशत से ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में UPI के तेजी से बढ़ते उपयोग ने डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगों के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
बायोकैच के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गाडी माजोर ने कहा कि AI ग्राहकों और वित्तीय संस्थानों के बीच बातचीत के तरीके को तेजी से बदल रहा है। साथ ही अपराधी भी AI की मदद से नए तरीकों से वित्तीय अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केवल पहचान सत्यापन (Identity Verification) पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों के व्यवहार, उनकी मंशा और भरोसे के पैटर्न को समझने वाली तकनीकों पर ज्यादा ध्यान देना होगा, तभी भविष्य के AI आधारित फ्रॉड से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा।