- वायुसेना दिवस पर विशेष: डीआरडीओ ने तैयार किए ऊर्जा निर्देशित हथियार, जल-थल-नभ से मार करने में सक्षम।-'दुर्गा' और 'काली' के सिस्टम से निकलने वाली एक्सरे और माइक्रोवेव ऊर्जा दुश्मन को भस्म कर देगी।
आनंद मणि त्रिपाठी
जयपुर । रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने ऊर्जा निर्देशित ऐसे हथियार तैयार किए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दुश्मन के किसी भी उपकरण, वस्तु और आदमी पर कहर बनकर टूटेंगे। इनमें से एक 'दुर्गा' (डायरेक्शनली अनरेस्ट्रिकटेड रे गन एरे) हवा, समुद्र और सतह से मार करने में सक्षम है। दूसरी 'काली' (किलो एम्पेरे लाइनर इंजेक्टर) दो अलग आवृत्तियों एक्स-रे व माइक्रोवेव पर काम करता है। इसकी माइक्रोवेव आवृत्ति विमान के उपकरण नष्ट करने में सक्षम है। ऐसे ही एक उपकरण का परीक्षण 2017 में तत्कालीन रक्षामंत्री अरुण जेटली के सामने चित्रदुर्गा में किया गया था। यह 250 मीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में कामयाब रहा था।
ताकत में बहुआयामी बढ़ोतरी... दुश्मनों की चुनौतियों के निपटने के लिए वायुसेना लगातार अपनी ताकत में बहुआयामी बढ़ोतरी कर रही है। वायुसेना प्रमुख के मुताबिक बहुप्रतीक्षित रूस निर्मित एस-400 (जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल) एक साल के भीतर वायुसेना में शामिल कर ली जाएगी। वायुसेना 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की प्रस्तावित खरीद को भी आगे बढ़ा रही है। इसे मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया जाएगा।
अब गुब्बारों पर खर्च नहीं होगी मिसाइल -
अंतरराष्ट्रीय सीमा या निषिद्ध क्षेत्र में दुश्मन के ड्रोन, बैलून या अन्य उड़ते उपकरण मार गिराने के लिए अब मिसाइल खर्च नहीं करनी पड़ेगी। उन्हें ऊर्जा निर्देशित हथियार से ही नष्ट किया जा सकेगा। राजस्थान बॉर्डर पर 2019 में बैलून मार गिराने के लिए सुखोई से मिसाइल दागी गई थी। राजस्थान में ही 2016 में एक पाकिस्तानी बैलून पर 97 गोलियां चलाई गई थीं।
नए वायुसेना प्रमुख ने भी दिखाई रुचि... भारतीय वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी ने हाल ही ऊर्जा निर्देशित हथियारों को लेकर कहा, जो नया उपकरण आएगा, वायुसेना अपनी परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के लिए उसे तुरंत तैनात करेगी। स्वदेशी एस्ट्रा, आकाश एडिशनल, 83 एलसीए, डीआरडीओ की एमआरएसएएम को जल्द तैनात किया जाएगा।