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IVF Couple Case: नौ महीने कोख में रखा, जन्म दिया, फिर DNA ने कहा- ये आपकी बेटियां नहीं हैं

IVF से जन्मीं जुड़वां बच्चियों के मामले में DNA रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि वे दंपती की जैविक संतान नहीं हैं। मामले में अस्पताल की भूमिका, कथित फर्जी दस्तावेज, बच्चों की पहचान और मानव तस्करी जैसी आशंकाओं को लेकर जांच जारी है, जबकि माता-पिता बच्चियों को अपना ही मान रहे हैं।

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भारत

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Anurag Animesh

Jun 16, 2026

IVF Couple Wrong Baby

माता-पिता राहुल राठौर और मीनू(फोटो-सोशल मीडिया)

IVF Couple Wrong Baby: हम अभी सिर्फ पांच महीने की हैं। हमें नहीं पता कि आइवीएफ या डीएनए क्या होता है या कानून की किताबों में हमारी पहचान किस नाम से दर्ज है। हम तो बस इतना जानती हैं कि हम जब रोती हैं तो एक मां हमें सीने से लगा लेती है, और जब घबराती हैं तो एक पिता हमें गोद में उठाकर चुप करा देता है। हमें घर में प्यार से 'चीकू' और 'स्ट्रॉबेरी' कहते हैं लेकिन हमारी असली पहचान की कहानी ऐसे सवाल की कहानी है, जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

जानें कहानी


कहानी है गुरुग्राम के राहुल राठौर (41) और मीनू (39) की जो दो बेटियों के बाद परिवार और बढ़ाना चाहते थे। 2024 के अंत में उन्होंने दिल्ली के एक नामी आइवीएफ हॉस्पिटल का रुख किया। मीनू ने इलाज के दौरान महीनों तक इंजेक्शनों का दर्द सहा और फिर नौ महीने तक गर्भ में पल रहे बच्चों को अपना सब कुछ समझकर संजोया। 5 जनवरी 2026 को जुड़वां बच्चियों का जन्म हुआ। घर में खुशियां आईं, लेकिन कुछ दिनों बाद दंपती को संदेह हुआ कि यह उनकी बच्चियां नहीं है। 8 जनवरी को कराए गए डीएनए परीक्षणों की रिपोर्ट 10 और 14 जनवरी को आई। नतीजे चौंकाने वाले थे।

डीएनए रिपोर्ट ने सब कुछ बदल दिया


दोनों बच्चियां जैविक रूप से न तो राहुल की संतान थीं और न ही मीनू की। इससे भी बड़ा खुलासा यह था कि दोनों बच्चियां आपस में सगी बहनें भी नहीं थीं। दोनों अलग-अलग अज्ञात डोनर्स के भ्रूण थे, जिन्हें एक ही गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया गया था। अस्पताल का कहना है कि दंपती के स्पर्म और एग व्यवहार्य नहीं थे और उनकी लिखित सहमति से डोनर भ्रूण का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर मीनू का दावा है कि कथित सहमति के समय वह एनेस्थीसिया के प्रभाव में थीं। राहुल का आरोप है कि दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर किए गए और रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां हैं।

अदालत को मानव तस्करी की आशंका


मामला अदालत पहुंचा तो साकेत कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने आशंका जताई कि मामला केवल लापरवाही या जालसाजी तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि मानव तस्करी या बच्चों की अदला-बदली जैसी आशंकाओं की भी जांच जरूरी है। अस्पताल ने इसके खिलाफ अपील की जो खारिज हो गई। मामले की जांच जारी है।

फिर भी नहीं टूटेगा ममता का रिश्ता


कानूनी लड़ाई, पुलिस जांच और सरकारी दफ्तरों के चक्कर के बीच छह महीने से राहुल काम पर नहीं जा पाए हैं। लेकिन इन सबके बीच दो बच्चियां हर दिन उसी मां की गोद में सोती हैं, जिसने उन्हें नौ महीने अपनी कोख में रखा। राहुल कहते हैं, 'हमें बस सच जानना था। जब तक कोई और सामने नहीं आता, ये मेरी बेटियां हैं।'

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