
पश्चिम बंगाल विधानसभा नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी
West Bengal Political: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों के 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में अचानक हुए ऐतिहासिक विलय के बाद अब राज्य विधानसभा के भीतर भी ममता बनर्जी के लिए संकट गहराता जा रहा है। टीएमसी से निष्कासित नेता और विधानसभा में नए बागी गुट के अगुआ (LoP) ऋतब्रत बनर्जी के बयानों ने साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर विद्रोह की यह आग सांसदों से बढ़कर अब तेजी से विधायकों तक फैल चुकी है।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। जब उनसे बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय और विधायकों की स्थिति पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'लोकसभा के 20 सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का फैसला किया है, वह पूरी तरह से उनका अपना व्यक्तिगत निर्णय है। हमारे सामूहिक गुट का उससे सीधा कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन जहां तक पश्चिम बंगाल विधानसभा का सवाल है, हमारे साथ विद्रोही विधायकों की संख्या अब 65 तक पहुंच चुकी है।'
इतना ही नहीं, ऋतब्रत बनर्जी ने संकेत दिया कि एक और विधायक ने हाल ही में उनके पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, उन्होंने रणनीतिक रूप से नामों का खुलासा करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैं अभी किसी भी विधायक के नाम को उजागर नहीं करूंगा, क्योंकि बंगाल मीडिया में अभी किसी को इसकी भनक नहीं है। लोग केवल कयास लगा सकते हैं, लेकिन हम पहले ही विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को अपना आधिकारिक पत्र सौंप चुके हैं। अगर इस चरण पर नाम सार्वजनिक होते हैं, तो यह विशेषाधिकार हनन का मामला बनेगा।'
जब ऋतब्रत बनर्जी से पूछा गया कि क्या दिल्ली के सांसदों की तरह बंगाल के ये 65 बागी विधायक भी आने वाले दिनों में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामेंगे? इस पर उन्होंने बेहद नपा-तुला जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'फिलहाल पश्चिम बंगाल विधायी दल (Legislative Party) के संदर्भ में हमारे पास विलय जैसी किसी भी गतिविधि की कोई जानकारी नहीं है। हमने भी टीवी रिपोर्टों के जरिए ही जाना कि 20 सांसदों ने एनसीपीआई में विलय किया है। हमारे गुट के भीतर अभी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।'
उन्होंने आगामी विधायी कार्यवाहियों पर बात करते हुए बताया कि कल होने वाली बिजनेस एडवाइजरी (BA) कमेटी की पहली बैठक में वे और उनके चीफ व्हिप हिस्सा लेंगे और सदन के भीतर बागी गुट की भूमिका तय करेंगे।
20 सांसदों के बाद अब 65 विधायकों के पाला बदलने की खबरों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है। इस अभूतपूर्व राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी नेतृत्व के पास अब बेहद सीमित कानूनी और राजनीतिक विकल्प बचे हैं:
दलबदल विरोधी कानून का इस्तेमाल: ममता बनर्जी विधानसभा अध्यक्ष के जरिए इन बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कराने के लिए कानूनी रास्ता अपना सकती हैं। हालांकि, यदि बागियों की संख्या कुल विधायकों के दो-तिहाई (2/3) पार कर जाती है, तो दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करना असंभव हो जाएगा।
भावनात्मक कार्ड और जमीनी लामबंदी: ममता बनर्जी दिल्ली और बाहरी ताकतों द्वारा पार्टी को तोड़े जाने का आरोप लगाकर सीधे जनता के बीच जा सकती हैं, जैसा कि वे अक्सर संकट के समय करती आई हैं।
अविश्वास प्रस्ताव और फ्लोर टेस्ट: यदि विपक्ष या बागी गुट सरकार के अल्पमत में होने का दावा करता है, तो ममता बनर्जी को सदन में अपना बहुमत साबित करना होगा, जो इस टूट के बाद बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
Published on:
15 Jun 2026 09:59 pm
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