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UP School Closures: शिक्षा तंत्र पर ‘तालाबंदी’ या सोची-समझी साजिश? अखिलेश यादव ने आरक्षण और भर्तियों पर सरकार को घेरा

Primary Schools in Uttar Pradesh : देश के शिक्षा तंत्र पर मंडराते संकट को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्राथमिक विद्यालयों के तालेबंद होने और उच्च शिक्षा में नियुक्तियों को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों ने नीति-नियंताओं की नीयत पर बहस छेड़ दी है।
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Akhilesh Yadav Targets BJP Over Education
Akhilesh Yadav: यूपी में स्कूल बंद होने और भर्ती प्रक्रिया पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल (फोटो सोर्स: ANI)

Akhilesh Yadav on BJP: देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के रोजगार को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर शिक्षा और आरक्षण तंत्र को ध्वस्त करने का सीधा आरोप मढ़ा है। राजधानी दिल्ली में मीडिया से मुखातिब होते हुए सपा प्रमुख ने प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों की बदहाली और नौकरियों के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

प्राथमिक स्कूलों पर लटके ताले, सीएम के गढ़ पर भी निशाना

अखिल भारतीय स्तर पर शिक्षा के बुनियादी ढांचे में आ रही गिरावट पर चिंता जताते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि देशभर में प्राथमिक विद्यालय बंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश की है, जहां अकेले 22,000 प्राथमिक स्कूलों पर ताले लटका दिए गए हैं।

योगी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने विशेष तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर का उदाहरण दिया। अखिलेश के मुताबिक, केवल गोरखपुर जिले में ही करीब 500 प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं।

वर्ग / संस्थानअखिलेश यादव द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु
प्राथमिक विद्यालयUP में 22,000 और अकेले गोरखपुर में 500 स्कूल बंद
इंटरमीडिएट व तकनीकी शिक्षाइंटरमीडिएट, पॉलिटेक्निक और ITI में नामांकन में भारी गिरावट
उच्च शिक्षण संस्थानमहत्वपूर्ण पदों पर 'एकरंगी' विचारधारा के लोगों का कब्जा
आरक्षण व नौकरियांएजेंडे से नौकरियां गायब, वंचित वर्गों के साथ बड़ा धोखा

तकनीकी और उच्च शिक्षा की स्थिति भी दयनीय

सपा प्रमुख का कहना है कि संकट सिर्फ प्राथमिक स्तर तक सीमित नहीं है। राज्य के इंटरमीडिएट कॉलेजों से लेकर पॉलिटेक्निक (Polytechnic) और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में छात्रों के प्रवेश (Admissions) न के बराबर हो रहे हैं।

उच्च शिक्षा की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और बड़े शैक्षणिक पदों पर 'एकरंगी' सोच वाले लोगों को बैठाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसकी शह और निर्देश पर ये नियुक्तियां की जा रही हैं?

"जब नौकरियां ही नहीं, तो कैसा आरक्षण?"

आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी के मुख्य एजेंडे से नौकरियां पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं। जब नौकरियां ही पैदा नहीं की जाएंगी, तो आरक्षण का प्रावधान अपने आप निष्प्रभावी हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा के हर स्तर पर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों (PDA वर्ग) के अधिकारों के साथ बड़ा छल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया और पीएम मोदी के वीडियो पर तंज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े वीडियो को हटाए जाने के सवाल पर चुटकी लेते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनावों तक इस तरह की चीजें होती रहेंगी—"कई चीजें हटाई जाएंगी और कई नई चीजें सामने आएंगी, यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।"

मुद्दा सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं: क्यों गहरा रहा है विवाद?

उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के विलय (Merger) और कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की नीति को लेकर राज्य सरकार का तर्क है कि इससे शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर होगा और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सकेगा। हालांकि, विपक्षी दलों का दावा है कि इस कदम से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के बच्चों के लिए शिक्षा पाना कठिन हो रहा है।

उच्च शिक्षा में नियुक्तियों का मामला भी लगातार अदालतों और सड़क पर युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों का कारण बनता रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव के इस आक्रामक रुख ने आने वाले चुनावों से पहले शिक्षा, बेरोजगारी और आरक्षण के मुद्दे पर सियासी तपिश और बढ़ा दी है।

Updated on:
28 Jul 2026 06:19 pm
Published on:
28 Jul 2026 06:19 pm