अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाले बिल को मंजूरी दी है। वहीं, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इसलिए चूक गया क्योंकि पीएम मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बिल को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर जल्द ही 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसमें भारत भी शामिल है।
वहीं, पिछले कई दिनों से यह खबर चल रही थी कि भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को लेकर अमेरिका और इंडिया के नेताओं के बीच बातचीत जारी है।
जिस पर अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने एक दिन पहले साफ कहा कि नेतृत्व स्तर पर सीधे बातचीत की कमी के कारण भारत-अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से चूक गया।
अब कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को लटनिक की टिप्पणियों को शेयर करके बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पीएम मोदी-ट्रंप की दोस्ती को लेकर जबरदस्त तंस कसा है।
अपने एक्स पोस्ट में रमेश ने लिखा- 'हग हग न रहा, पोस्ट पोस्ट न रहा, क्या से क्या हो गया बेवफा तेरी दोस्ती में।' उनकी यह टिप्पणी लटनिक के उस दावे के बाद आई है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता इसलिए रुक गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।
एक पॉडकास्ट में गुरुवार को लटनिक ने कहा कि भारत-अमेरिकी अधिकारियों के बीच सारी बातचीत हो चुकी थी। डील का मसौदा भी तैयार था, लेकिन आखिरी बात पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच होनी थी।
लटनिक ने आगे कहा- हमने भारतीय अधिकारियों को साफ कहा था यह ट्रंप का सौदा है। सब पहले से सेट है। आपको डील फाइनल करने के लिए पीएम मोदी से राष्ट्रपति को फोन करवाना होगा।
अमेरिकी मंत्री ने आगे कहा- वे (मोदी) ऐसा करने में असहज थे। इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया। अगले सप्ताह हमने इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम के साथ सौदे किए, हमने बहुत सारे सौदों की घोषणा की।
यूनाइटेड किंगडम के साथ पहले व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए लटनिक ने कहा कि ट्रंप से बार-बार पूछा गया कि अगला देश कौन सा होगा और भारत का नाम सार्वजनिक रूप से कई बार लिया गया। उन्होंने कहा कि भारत को डील पूरी करने के लिए तीन शुक्रवार का समय दिया गया था, लेकिन वह नहीं कर पाए।
लटनिक के अनुसार, भारत डेडलाइन पूरी नहीं कर पाया और इसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम सहित कई एशियाई देशों के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया।