Iran-Israel War: ईरान ने जंग के बीच भारत को आश्वासन दिया है। ईरान ने भारत को दोस्त बताते हुए कहा कि होर्मुज को लेकर इंडिया को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
Iran Offers Assurance India: पश्चिम एशिया में जंग का धुआं अभी थमा नहीं है, लेकिन इस तबाही के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई। ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने नई दिल्ली में साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा, क्योंकि भारत और ईरान के साझा हित हैं और साझा तकदीर भी।
उस वक्त भारत के करीब 27 जहाज होर्मुज और गल्फ ऑफ ओमान के पास फंसे थे, जिन पर 753 भारतीय नाविक सवार थे। इन सबके परिवार घर बैठकर खबरें देख रहे थे और दुआएं मांग रहे थे। ईरानी राजदूत के बयान के कुछ ही घंटों बाद भारतीय झंडे वाले दो जहाज सुरक्षित होर्मुज पार कर गए। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बात की और विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से 28 फरवरी के बाद चौथी बार फोन पर बातचीत की। भारत ने BRICS देशों के साथ मिलकर भी इस संकट पर साझा रुख बनाने की कोशिश की।
खाड़ी के भीतर 2,000 से ज्यादा जहाज फंसे हैं, जिन पर करीब 20,000 नाविक सवार हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि आधुनिक इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर नाविकों के फंसने और उनके सामने खड़े मानवीय संकट का कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। एक अनुमान के अनुसार इसमें 20 से 30 फीसदी नाविक भारतीय हो सकते हैं। निकलने का रास्ता नहीं, रुकना सुरक्षित नहीं मध्य-पूर्व में जारी भीषण बमबारी के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है।
पहले जहां रोजाना 150 जहाज गुजरते थे, अब मुश्किल से 4 या 5 ही निकल पा रहे हैं। पिछले एक महीने में 19 जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें 10 नाविकों की जान जा चुकी है। जहाजों पर राशन और पानी खत्म होने की कगार पर है। हालांकि सऊदी अरब और ओमान से कुछ मदद भेजी जा रही है, लेकिन युद्ध क्षेत्र में इसका वितरण बेहद कठिन है। ईरान का कहना है कि वह केवल 'गैर-शत्रु' जहाजों को ही रास्ता देगा, लेकिन 'शत्रु' की परिभाषा क्या है, इस पर सस्पेंस बरकरार है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए। तब से अब तक यह जंग कम से कम एक दर्जन देशों तक फैल चुकी है, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है और 2,300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी हमले तेज किए और कई खाड़ी देशों में अमेरिका व इजरायल के ठिकानों को निशाना बनाया।
अब तक ईरान में 1,900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। लेबनान में 1,189 और इराक में 99 मौतें हो चुकी हैं। अमेरिका के 13 सैनिक भी इस लड़ाई में जान गंवा चुके हैं। ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हमले में 170 से ज्यादा बच्चियां मारी गईं, जो अब तक का सबसे दर्दनाक हादसा रहा।
इस्फहान और तेहरान में भारी बमबारी जारी है। तेहरान में इंटरनेट बंद है और बिजली गुल हो रही है। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर जंग नहीं रुकी तो ईरान के बिजलीघर और तेल कुएं तबाह कर दिए जाएंगे। यमन के हूती भी अब इस जंग में कूद पड़े हैं और इजरायल पर मिसाइलें दाग रहे हैं। पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्री इस्लामाबाद में शांति वार्ता कर रहे हैं। भारत के लिए यह जंग सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सीधे उसकी ऊर्जा सुरक्षा और हजारों नागरिकों की जिंदगी से जुड़ा मसला है। फिलहाल कूटनीति काम कर रही है, लेकिन आग अभी बुझी नहीं है।