
Punjab Politics: पंजाब में नशे के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमित शाह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तीन महीने में नशा खत्म करने का वादा करने के बावजूद पांच साल में हालात नहीं सुधरे। इसके जवाब में भगवंत मान ने शाह पर पलटवार करते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा से नशे और हथियारों की तस्करी रोकने में केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए।
पंजाब दौरे के दौरान अमित शाह ने कहा कि राज्य में नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और पुलिसकर्मियों तक से हेरोइन बरामद होने के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को परेशान किया जा रहा है या उनकी हत्या हो रही है। शाह ने AAP सरकार से इस स्थिति की जिम्मेदारी लेने को कहा।
अमित शाह ने कहा कि पंजाब में सत्ता में आने से पहले AAP ने तीन महीने के भीतर नशे का कारोबार खत्म करने का वादा किया था, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी समस्या बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों से 10 से 12 किलोग्राम तक हेरोइन बरामद की जा रही है। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ बोलने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
अमित शाह के आरोपों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने गृह मंत्री पर पंजाब में सस्ती राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में नशे की समस्या पर सवाल उठाने से पहले केंद्र सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए। मान ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर नशे और हथियारों की तस्करी रोकने में केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने गुजरात में बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद होने के मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि बीजेपी और केंद्र सरकार ने उन मामलों में क्या ठोस कार्रवाई की। मुख्यमंत्री ने 2007 से 2017 के बीच पंजाब में चिट्टे और गैंगस्टर संस्कृति के फैलाव को लेकर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्र से जवाब मांगा।
पंजाब में नशे का कारोबार लंबे समय से राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रहा है। अमित शाह ने राज्य सरकार को उसके चुनावी वादे की याद दिलाते हुए नशे पर नियंत्रण में नाकामी का आरोप लगाया, जबकि भगवंत मान ने केंद्र सरकार की जिम्मेदारी और अन्य राज्यों में ड्रग्स की बरामदगी को लेकर सवाल उठाए।