लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'नक्सलियों ने तिलका मांझी को अपना आदर्श नहीं माना। न ही उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, भगत सिंह या सुभाष बाबू को अपना आदर्श माना। तो फिर, वे किसे अपना आदर्श मानते हैं?
Amit Shah Lok Sabha Speech: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है और अब यह क्षेत्र विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि जो लोग नक्सलवाद की वकालत करते थे, वे बताएं कि अब तक यह समस्या क्यों नहीं सुलझी।
लोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा, 'आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के हर गांव में एक स्कूल स्थापित करने का अभियान चलाया गया। क्षेत्र के हर गांव में राशन की दुकान खोलने का अभियान चलाया गया। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं।'
गृह मंत्री ने आगे कहा कि बस्तर के लोगों को पहले रेड टेरर की छाया में विकास से वंचित रखा गया था। अब वह छाया हट चुकी है और क्षेत्र विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने उन लोगों से सवाल किया जो सशस्त्र आंदोलन की वकालत करते हैं। गृह मंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला, 'क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? अगर अन्याय होता है तो अदालतें, विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसीलें बनी हुई हैं।'
उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्षों में से 60 वर्ष कांग्रेस की सत्ता रही, फिर भी आदिवासी समुदाय विकास से वंचित क्यों रहे? कांग्रेस सरकारों ने आदिवासियों को न घर दिए, न साफ पानी, न स्कूल, न मोबाइल टावर और न ही बैंकिंग सुविधाएं। अब मोदी सरकार में इन क्षेत्रों में असली विकास हो रहा है।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह बनाया जाएगा। सरकार इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील है और सभी शिकायतों को सुनने तथा हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार में बस्तर अब विकास का प्रतीक बन रहा है।
बस्तर क्षेत्र में स्कूल, राशन दुकानें, स्वास्थ्य केंद्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और पांच किलो अनाज जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मोबाइल टावर और बैंकिंग सेवाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। गृह मंत्री ने जोर दिया कि सशस्त्र संघर्ष का दौर अब समाप्त हो चुका है और संवैधानिक माध्यमों से समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। बस्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों को तेज किया गया है।