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क्या यूरोप का सबसे बड़ा टेक और क्लाइमेट पार्टनर बन रहा है भारत? इंडिया-नॉर्डिक समिट से मिले बड़े संकेत

India Nordic Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दशक बाद नॉर्वे पहुंचे हैं, जहां वे तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। भारत और 5 नॉर्डिक देशों के बीच ग्रीन एनर्जी, एआई, सेमीकंडक्टर, डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य की टेक्नोलॉजी को लेकर रणनीतिक साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है।

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भारत

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Rahul Yadav

May 18, 2026

India Nordic Summit 2026 PM Modi

PM Modi (AI Photo)

India Nordic Summit 2026 PM Modi: इंडिया-नॉर्डिक समिट अब सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक बैठक नहीं रह गई है। यह धीरे-धीरे दुनिया की सबसे अहम भविष्य-केंद्रित साझेदारियों में बदलती दिख रही है। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ती नजदीकियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट और वैश्विक सप्लाई चेन की राजनीति में यह गठजोड़ बड़ी भूमिका निभा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में हिस्सा लेने के लिए नॉर्वे पहुंचे हैं। यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि 1983 में इंदिरा गांधी की यात्रा के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला नॉर्वे दौरा है।

क्यों अहम हो गया इंडिया-नॉर्डिक गठजोड़?

समिट में नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं। ये देश आबादी में भले छोटे हों, लेकिन टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, डिजिटल गवर्नेंस और इनोवेशन के क्षेत्र में दुनिया के सबसे उन्नत देशों में गिने जाते हैं। दूसरी तरफ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन बिखर रही हैं और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, भारत और नॉर्डिक देशों की साझेदारी को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ व्यापार बढ़ाने की कोशिश नहीं है, बल्कि भरोसेमंद टेक्नोलॉजी नेटवर्क, डिजिटल स्टैंडर्ड और लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है।

19 अरब डॉलर तक पहुंचा व्यापार

भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच कारोबार करीब 19 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 700 से ज्यादा नॉर्डिक कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, जबकि करीब 150 भारतीय कंपनियों ने नॉर्डिक देशों में अपनी मौजूदगी बनाई है।

यह रिश्ते अब केवल सीमित आर्थिक सहयोग तक नहीं रह गए हैं, बल्कि टेक्नोलॉजी और निवेश आधारित साझेदारी में बदलते जा रहे हैं।

क्लाइमेट पार्टनरशिप बनी सबसे बड़ा फोकस

इंडिया-नॉर्डिक समिट का सबसे अहम पहलू क्लाइमेट सहयोग बनता जा रहा है। नॉर्डिक देश ग्रीन एनर्जी, ऑफशोर विंड, कार्बन कैप्चर, स्मार्ट ग्रिड और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हैं। वहीं भारत तेजी से बढ़ता हुआ क्लीन एनर्जी मार्केट बन चुका है। यूरोप को बड़े स्तर पर ग्रीन टेक्नोलॉजी लागू करने के लिए भारत जैसे विशाल बाजार की जरूरत है, जबकि भारत को उन्नत तकनीक, निवेश और फाइनेंस मॉडल की आवश्यकता है।

यही वजह है कि समिट में ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक पोर्ट, बैटरी इकोसिस्टम, वेस्ट-टू-एनर्जी और क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों पर खास फोकस किया जा रहा है।

सप्लाई चेन और सेमीकंडक्टर पर भी नजर

दुनिया भर में सप्लाई चेन संकट और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच भारत और नॉर्डिक देश भविष्य की इंडस्ट्रीज में सहयोग बढ़ा रहे हैं। सेमीकंडक्टर डिजाइन, रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल, साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे सेक्टर्स अब केवल कारोबारी क्षेत्र नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक ताकत का हिस्सा बन चुके हैं।

भारत को भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर चाहिए, जबकि नॉर्डिक देशों को बड़े बाजार, प्रतिभा और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की जरूरत है। यही रणनीतिक जरूरत दोनों पक्षों को और करीब ला रही है।

डिजिटल गवर्नेंस और आर्कटिक रणनीति पर भी चर्चा

भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल और नॉर्डिक देशों की ई-गवर्नेंस विशेषज्ञता मिलकर नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं। हेल्थटेक, एडटेक, साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो रही है।

इसके अलावा आर्कटिक क्षेत्र भी इस साझेदारी का नया अहम आयाम बनता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन और बदलते समुद्री व्यापार मार्गों के बीच भारत आर्कटिक मामलों में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाना चाहता है।

यूरोप की रणनीतिक चिंता से भारत को फायदा

यूरोप इस समय आर्थिक अस्थिरता, सुरक्षा चिंताओं और वैश्विक राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है। ऐसे में यूरोपीय देश भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदारों की तलाश में हैं। नॉर्डिक देशों के बड़े संप्रभु और पेंशन फंड भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन इंडस्ट्री सेक्टर में निवेश बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में इंडिया-नॉर्डिक साझेदारी केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली बड़ी रणनीतिक धुरी बन सकती है।