AMUL ने बयान जारी करके कहा है कि अमूल घी पिछले 50 वर्षों से ज्यादा लंबे समय से भारतीय घरों में एक विश्वसनीय ब्रांड बना हुआ है।
Tirupati Temple Laddoo Row: आंध्र प्रदेश के तिरुमाला जिले के तिरुमाला मंदिर में दिए जाने वाले प्रसाद में जानवरों की चर्बी (Animal Fat in Tirupati Temple Laddoo) के इस्तेमाल को लेकर विवाद के बीच डेयरी प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी अमूल ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया। कंपनी ने बयान में कहा कि उसने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम(Tirumala Tirupati Devasthanams) को कभी घी की आपूर्ति नहीं की है। Amul ने X पर एक बयान पोस्ट किया जिसमें कहा गया कि अमूल ने कभी भी आपूर्ति कभी भी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को नहीं की है। बयान में कहा गया है, "यह कुछ सोशल मीडिया पोस्ट के संदर्भ में है जिसमें उल्लेख किया गया है कि अमूल घी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (Tirumala Tirupati Devasthanams) को आपूर्ति की जा रही थी। हम सूचित करना चाहते हैं कि हमने कभी भी TTD को अमूल घी की आपूर्ति नहीं की है।"
कंपनी ने कहा, "हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि अमूल घी हमारी अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाओं में दूध से बनाया जाता है जो आईएसओ प्रमाणित है। अमूल घी उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध दूध वसा से बनाया जाता है। हमारी डेयरियों में प्राप्त दूध एफएसएसएआई द्वारा निर्दिष्ट मिलावट कड़े मानकों से होकर गुजरता है।"
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (Andhra Pradesh Chief Minister Chandrababu Naidu) ने दो दिन पहले दावा किया कि पिछली युवजन श्रमिका रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की राज्य में सरकार के दौरान तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर (Sri Venkateswara temple) में चढ़ाए जाने वाले मिठाई तिरुपति लड्डू में जानवरों की चर्बी सहित घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने तिरुपति लड्डू मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टीडीपी "धार्मिक मामलों का राजनीतिकरण कर रही है।"
वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा "निविदा प्रक्रिया हर छह महीने में होती है और योग्यता मानदंड दशकों से नहीं बदले हैं। आपूर्तिकर्ताओं को एक एनएबीएल प्रमाणपत्र और एक उत्पाद गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान करना होगा। टीटीडी घी के नमूने एकत्र करता है और केवल प्रमाणीकृत उत्पादों का उपयोग किया जाता है। टीडीपी धार्मिक मामलों का राजनीतिकरण कर रही है। हमारे शासन में हमने 18 बार उत्पादों को खारिज कर दिया है।"
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (Union Health Minister JP Nadda) ने शुक्रवार को सीएम नायडू (CM Chandrababu Naidu) से बात की और इस मुद्दे पर पूरी रिपोर्ट मांगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र मामले की जांच करेगा और उचित कार्रवाई करेगा।
मोदी सरकार की 100 दिनों की उपलब्धियों पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जब नड्डा से तिरुपति प्रसादम में मिलावट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "इस बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद मैंने आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू से बात की है और उनसे विवरण लिया है। उन्हें उपलब्ध रिपोर्ट साझा करने के लिए कहा गया है ताकि मैं इसकी जांच कर सकूं। मैं राज्य नियामक एजेंसियों से भी बात करूंगा कि वह इसकी जांच करें और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।"
वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी (YSRCP chief Jagan Mohan Reddy) ने शुक्रवार को कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखेंगे और दावा किया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। YSRCP प्रमुख ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा,"आखिरकार, मैं खुद प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहा हूं। मैं भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र लिख रहा हूं। मैं उन्हें समझा रहा हूं कि चंद्रबाबू नायडू ने तथ्यों को कैसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया और कार्रवाई क्यों की।" ऐसा करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।''
टीडीपी सांसद श्रीभरत मथुकुमिल्ली (TDP MP Sribharat Mathukumilli) ने कहा कि रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एस वैल्यू के आधार पर एक विशेष वसा निर्धारित सीमा के भीतर नहीं है तो यह दूध वसा नहीं है। यह घी नहीं है।
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