
Anand Dubey on SIR:शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, राम मंदिर से जुड़े दान मामले और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसीके बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि SIR के दौरान किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं छूटना चाहिए।
आनंद दुबे ने दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में कहा कि आंदोलन करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राजनीतिक दलों से जुड़े मुद्दों पर बात करती है और अन्य संगठनों के आंदोलनों पर टिप्पणी करना जरूरी नहीं समझती। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संगठन अपने तरीके से आंदोलन कर सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी का ध्यान राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर है।
चुनाव आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने का जिक्र करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि चुनाव से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से पूरी हों। आनंद दुबे ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और मतदाताओं को पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
SIR की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि यह प्रक्रिया बिहार से शुरू हुई और इसके बाद महाराष्ट्र तथा पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों तक पहुंची। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की चिंता यह है कि मतदाता सूची में किसी योग्य व्यक्ति का नाम नहीं छूटना चाहिए। साथ ही, गलत तरीके से किसी ऐसे व्यक्ति का नाम भी सूची में शामिल नहीं होना चाहिए जो मतदान के लिए पात्र नहीं है। आनंद दुबे ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सावधानी दोनों जरूरी हैं।
अयोध्या के राम मंदिर में दानपात्र से जुड़े कथित चोरी के मामले में चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाए जाने के मुद्दे पर भी आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए लंबे समय तक लोगों ने योगदान और प्रयास किए हैं। ऐसे में मंदिर के दान से जुड़ा मामला सामने आने के बाद लोगों में चिंता पैदा हुई।
आनंद दुबे ने कहा कि मामले में कई लोगों पर आरोप लगे हैं और जांच से जुड़े घटनाक्रम के कारण मामला जटिल दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए CBI जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक विस्तृत जांच नहीं होती, तब तक यह स्पष्ट करना मुश्किल है कि मामले में किसकी क्या भूमिका थी।
SIR को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणियों पर आनंद दुबे ने AIMIM प्रमुख पर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और AIMIM के बीच राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी होती है। आनंद दुबे ने आरोप लगाया कि ओवैसी और भाजपा के बीच राजनीतिक तालमेल की स्थिति है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के बयानों का इस्तेमाल करते हैं।
आनंद दुबे इससे पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं। हालिया बयान में उन्होंने कहा था कि विपक्ष चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है और आयोग को अपनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।