
AnnamalaiWe The Leaders: के. अन्नामलाई सिर्फ तमिलनाडु में ही, बल्कि उत्तर भारत में भी सियासत के जाने-माने चेहरे बन चुके हैं। बीजेपी में रहते हुए उन्होंने यह ख्याति प्राप्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीबी और वाकपटुता की वजह से मीडिया की नजर भी उन पर बनी रही। बीते जून महीने में उन्होंने आधे दशक से ज्यादा समय तक बीजेपी के साथ बने रहने के बाद अलग रास्ता चुन लिया। उन्होंने तब ऐलान किया था कि वह तमिलनाडु में स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन खड़ा करेंगे, अपनी पार्टी बनाएंगे और 2031 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करेंगे, लेकिन अब उनकी रणनीति बदलती हुई दिखाई दे रही है।
के अन्नामलाई ने बीते 14 अक्टूबर को घोषणा की कि 'वी द लीडर्स' अगले साल तमिलनाडु में होने वाले निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारेगा। इसके अगले दिन यानी 15 अक्टूबर को उन्होंने अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे जमीनी स्तर के नेताओं की नई पीढ़ी तैयार करने वाली संस्था बताया।
अन्नमलाई के रणनीति में बदलाव के पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है कि उन्होंने "वी द लीडर्स" के लिए 50 लाख सदस्यों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था, लेकिन इस कवायद से जुड़े लोगों के मुताबिक यह करीब 20 लाख समर्थकों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके साथ ही, उन्हें इस बात की भी चिंता है कि अगर चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने में देरी करते हैं तो उनके समर्थकों का उत्साह घट जाएगा और उनमें से एक बड़ा हिस्सा किसी दूसरी पार्टी की तरफ भी जा सकता है।
के. अन्नमलाई का उभार भी ऐसे समय में हुआ है, जब पूर्व सीएम जयललिता और एम करुणानिधि के निधन के बाद तमिलनाडु में नई पीढ़ी लगातार राजनीतिक जमीन पर अपने पैर मजबूत करते जा रही है। हालिया, उदाहरण सीएम विजय जोसेफ का भी है। विजय की पार्टी TVK ने पहले ही चुनाव में अभूतपूर्व जीत दर्ज की। तमिलनाडु के सियासी गलियारों में चर्चा है कि अभिनेता धनुष भी राज्य की राजनीति में दाखिल होने की कोशिश में हैं। जिस तमिलनाडु को कभी अपने अगले राजनीतिक सितारे का इंतजार था। वहां अब ऑडिशन का कार्यक्रम खासा व्यस्त है।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए DMK के एक सीनियर नेता ने कहा कि अन्नमलाई प्रबल विरोधी बन सकते हैं। मीडिया की उन पर निगाह रहती है। वह लोगों को आकर्षित करने में सभी सफल रहे हैं। जो काम बड़े नेता एक बड़ी टीम के साथ करते हैं, वही काम अन्नमलाई विधानसभा में अकेले कर सकते हैं। वह हाजिरजवाबी में माहिर हैं। कोयंबटूर के एक वरिष्ठ आरएसएस नेता ने कहा कि अन्नामलाई की समस्या राजनीतिक क्षमता की कमी नहीं है। उनके सबसे बड़े विरोधी भी उन्हें संभावित रूप से प्रभावशाली विधायी प्रदर्शन करने वाला नेता मानते हैं। समस्या ध्यान खींचने और ऐसी पार्टी खड़ी करने के बीच की दूरी है, जो उस ध्यान को थामे रख सके। सालों तक उनके भाषणों को वह श्रोता मिलता रहा, जिसे भाजपा पहले से जुटा चुकी थी। अब उन्हें श्रोता खुद जुटाना है, उन्हें रोके रखने के लिए मनाना है और आखिर में उनसे वोट मांगना है।
उन पर नजर रखने वाले पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता अक्सर उन्हें उपलब्ध संगठनात्मक ताकत से कहीं ज्यादा रही है। भाजपा से उनके बाहर होने के बाद यह अंतर और अहम हो गया है। अन्नामलाई के करीबी एक व्यक्ति के मुताबिक, अगर उनका मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजनीति में करियर होता, तो उनकी महत्वाकांक्षाओं को भाजपा में ही जगह मिल सकती थी। लेकिन स्वतंत्र पार्टी खड़ी करने के लिए कुछ अलग चाहिए।
अन्नामलाई ने आधे दशक से ज्यादा समय तक तमिलनाडु में भाजपा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक के रूप में काम किया। उनकी राजनीतिक पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब से जुड़ी रही, जबकि अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी और भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं सहित अन्य नेताओं से उनके रिश्ते टकराव और तालमेल के बीच झूलते रहे।
लेकिन, बीते दिनों अन्नमलाई ने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा था। 21 अक्टूबर को उन्होंने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई वाले प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने भाषण में 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी द्वारा दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना को याद किया और कहा कि मोदी तब सही थे।
अन्नामलाई की मौजूदा राजनीतिक शब्दावली में एक टकराव अब भी काफी हद तक गायब है। उन्होंने भाजपा और मोदी को चुनौती देना शुरू कर दिया है, लेकिन विजय पर अब तक वैसा हमला नहीं किया है, जिनकी सरकार तमिलनाडु में उनकी महत्वाकांक्षाओं की सबसे फौरी बाधा है। टीवीके का गंभीरता से सामना किए बिना भाजपा का विरोध करने से उनके स्वतंत्र आंदोलन का राजनीतिक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। स्थानीय निकाय चुनाव उन्हें यह चुनाव उनकी मूल योजना से पहले ही करने पर मजबूर कर सकते हैं।