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देश में दोगुनी से ज़्यादा रफ्तार से बढ़ी एंग्ज़ायटी

Anxiety In India: भारत में बढ़ती एंग्ज़ायटी एक गंभीर विषय है। युवाओं में बढ़ती एंग्ज़ायटी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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Updated: 26 May 2026, 4:13 PM IST
Anxiety increasing in India
Anxiety increasing in India

तेज़ रफ्तार जीवनशैली, भविष्य को लेकर बढ़ती असुरक्षा और कोविड-19 के बाद बदले सामाजिक माहौल ने मानसिक स्वास्थ्य संकट को और गंभीर बना दिया है। जो एंग्ज़ायटी कभी सामान्य घबराहट मानी जाती थी, वो अब युवाओं के सामने बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। मेडिकल जर्नल The Lancet की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले 30 वर्षों में एंग्ज़ायटी के मामलों में 123.5% का इज़ाफा हुआ है।

युवा सबसे ज़्यादा प्रभावित

डिजिटल दुनिया में अलग-थलग पड़ते जा रहे युवा एंग्ज़ायटी की सबसे बड़ी चपेट में हैं। दुनियाभर में करीब 1.2 बिलियन लोग किसी न किसी मानसिक परेशानी के साथ जीवन जी रहे हैं। चिंता की बात यह है कि डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी से जूझ रहे लोगों में केवल 9% तक ही न्यूनतम आवश्यक इलाज पहुंच पा रहा है।

15 करोड़ भारतीयों को मदद की ज़रूरत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि देश में लगभग 15 करोड़ लोगों को तुरंत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की ज़रूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2’ चला रही है। यह सर्वे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 2.5 लाख लोगों पर किया जा रहा है, जिसमें 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों के साथ 13 से 17 वर्ष के किशोर भी शामिल हैं।

क्या है देश में स्थिति?

1990 में देश में एंग्ज़ायटी के प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 2,592 मामले थे और 2023 में ये बढ़कर प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 5,793 मामले हो गए हैं। 1990 में देश में डिप्रेशन के प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 2,148 मामले थे जो बढ़कर 2023 में के प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 2,800 हो गए हैं। 1990 में देश में सिजोफ्रेनिया के प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 316 मामले थे जो 2023 में बढ़कर के प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 321 हो गए हैं। वहीँ 1990 में देश में डिस्टीमिया के प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 902 मामले थे जो 2023 में बढ़कर प्रति लाख जनसंख्या पर लगभग 949 मामले हो गए। 2026 में ये सभी आंकड़े और भी ज़्यादा हैं।

किशोरों और युवाओं पर बढ़ता दबाव

रिपोर्ट के अनुसार मानसिक बीमारियों का सबसे ज्यादा असर 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों और युवाओं पर देखा जा रहा है। पढ़ाई, करियर और रिश्तों से जुड़ा तनाव उनकी मानसिक स्थिति पर लगातार असर डाल रहा है। महिलाओं में एंग्ज़ायटी और डिप्रेशन के मामले पुरुषों की तुलना में ज़्यादा पाए गए हैं, जबकि पुरुषों में एडीएचडी, ऑटिज़्म और व्यवहार संबंधी विकार ज्यादा देखने को मिले हैं।

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26 May 2026, 4:13 PM IST
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