
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की दीवार पर लिखे नारे (फोटो - Rajat Jain)
JKSA on Free Kashmir Slogan: जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' के नारे लिखे जाने को लेकर आपत्ति जताई है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में एसोसिएशन ने इन विवादित नारों की निंदा की और जामिया प्रशासन तथा दिल्ली पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने कहा कि वे किसी ऐसे विचार या नारे का समर्थन कभी नहीं कर सकते जो देश को बांटने की बात करता हो। इसके अलावा, एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर आरोप लगाया है कि वे इस घटना का इस्तेमाल छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलन को बदनाम करने और दबाने के लिए कर रहे हैं।
नासिर खुहामी ने विवादित नारों पर संगठन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे ऐसे किसी भी नारे का समर्थन नहीं करते जो भारत के विभाजन की बात करता हो। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। खुहामी ने आरोप लगाया कि ऐसे भड़काऊ नारों के जरिए छात्रों के पूरे लोकतांत्रिक आंदोलन को पटरी से उतारने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है।
उन्होंने मांग की कि जामिया की दीवारों पर ये नारे लिखने वालों की तुरंत पहचान की जाए और यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
एसोसिएशन ने कहा कि जामिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शन छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों, उचित प्रतिनिधित्व और छात्र संघ चुनाव की बहाली के लिए है। इन मांगों को भड़काऊ नारों की आड़ में खारिज करने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने कहा कि कुछ अज्ञात लोगों द्वारा लिखे गए नारों के लिए पूरे छात्र समुदाय को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से अनुचित है। घटना में शामिल लोगों की पहचान करने और यह पता लगाने के लिए कि क्या इसके पीछे कोई बाहरी तत्व थे, परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुख की आलोचना की है। उनका कहना है कि मंत्री इस घटना का इस्तेमाल छात्र आंदोलन को अवैध ठहराने और उनकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए कर रहे हैं।
JKSA ने बताया कि छात्र केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं और एक चुनी हुई छात्र यूनियन चाहते हैं। लेकिन, उनकी जायज चिंताओं को दूर करने के बजाय, राजनेता इस विवाद का फायदा उठाकर लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दे से भटका रहे हैं और एक शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
Updated on:
24 Oct 2026, 12:05 PM IST
Published on:
24 Oct 2026, 12:04 PM IST
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